रायगढ़। अपनी शाम रंगीन करने के लिये जो पैसे का हिसाब नहीं रखते, वे खरीदते समय वापसी चिल्हर की परवाह नहीं करते। ऐसे स्थिति में उन्हें एक-एक पाई का हिसाब रखना होता है इस हिसाब में इन दिनों पुसौर के शासकीय शराब दुकान में कृत्रिम चिल्हर की कमी बताकर शेष राशि वापस नहीं की जा रही है। बीते दिवस को देशी शराब दुकान में इस तथ्य की पुष्टि हुई जिसमें वहां मदिरा प्रेमियों द्वारा बताया गया कि देशी शराब एक पौवा की कीमत 80 रूपया है जो 100 रूपये लेकर जाने से 20 रूपये बाद में लेना कहकर वापिस नहीं की जाती और नहीं तो चिल्हर लेकर आने का हवाला दिया जाता है।

इसी कड़ी में उन्होंने बताया कि कभी-कभी 3 पाव में भी शराब का असर नहीं दिखता। इसका मतलब यह है कि शराब में पानी मिलाया जा रहा है। कुछ समय पहले जब शराब का भण्डारण होता था तो उनका स्केनिंग की जाती थी अब स्केनिंग प्रक्रिया बंद हो गई है। इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि जो शराब का भंडारण किया जा रहा है वह सभी शासकीय दस्तावेज में इन्द्राज नहीं होता है और जिसका स्टाक एन्ट्री भी नहीं है इसका मतलब सीधा है कि उसका फायदा राशि शासकीय कोष में दर्ज नहीं हो सकता।

उल्लेखनीय है कि पुसौर छोड़कर जिले के सभी शासकीय शराब दुकानों की जांच हो चुकी है इसमें पुसौर छूटा हुआ है जबकि यहां भी अनियमितताओं का अम्बार है। यहां के सेल्समैन से पूछने पर बताया कि अंग्रेजी शराबों की स्केनिंग होती है और देशी का नहीं होता तथा चिल्हर की व्यवस्था जितना रखने से भी कम हो जाता है और इसके लिये सुपरवाईजर व आबकारी अधिकारी को बता चुके हैं । इस संबंध में संबंधित आबकारी अधिकारी से संपर्क करने के बावजूद भी बात नहीं हो पाई।
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