छत्तीसगढ़: सोलर एनर्जी से रौशन होगा रेलवे मंडल,रेलवे के इस प्रोजेक्ट के बारे में जानिए……
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रेलवे अब सोलर एनर्जी से रौशन होगा। सौर ऊर्जा का इस्तेमाल पहले ट्रैक्शन और शंटिंग में किया जाएगा, फिर रेल इंजन में भी इसका प्रयोग शुरु किया जाएगा।
इसके लिए एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आरईएमसीएल) के सहयोग से दुर्ग के 210 एकड़ क्षेत्र में 50 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जा रहा है। यह पूरे देश में रेलवे के सबसे बड़े सोलर प्लांट के रूप में भिलाई-चरोदा में आकार ले रहा है।
अक्टूबर 2022 तक मिल सकेगी बिजली
चेन्नई की सन एडिशन कम्पनी के अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में पेनलों को आपस में जोड़ने, इनवर्टर की स्थापना करने, सोलर मॉड्यूल लगाने समेत अन्य काम होंगे। निर्माण कंपनी के अफसरों के मुताबिक अक्टूबर तक काम पूरा हो सकता है। मार्च 2019 में सोलर प्लांट लगाने के काम को अप्रूवल मिला। अक्टूबर 2021 तक काम पूरा करना था लेकिन कोविड अन्य कारणों से एक साल अतिरिक्त लगा है। अक्टूबर माह से इससे बिजली लेना शुरू हो जाएगा।
ट्रैक्शन और शंटिंग कार्य में उपयोग से होगी शुरुआत
इस सोलर एनर्जी प्लांट से मिलने वाली बिजली का पहले उपयोग ट्रैक्शन और शंटिंग के काम में किया जाएगा। सफलता मिलने के बाद रेलवे के अन्य उपक्रमों में भी इसका उपयोग किया जाएगा। इंजन भी चलाए जा सकेंगे। रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टरों को भी इससे रोशन किया जा सकेगा। इससे न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि बिजली गुल होने के बाद भी रेलवे का काम नहीं अटकेगा।
रेलवे के इस प्रोजेक्ट के बारे में जानिए
रेलवे के इस प्रोजेक्ट को साल 2019 में अप्रूवल मिला जिसके बाद दुर्ग में 210 एकड़ जमीन का चयन किया गया। 310 करोड़ रुपए की लागत से यह प्लांट लगाया जा रहा है। रेल मंडल इस पूरे प्लांट से 20 फीसदी ग्रीन एनर्जी का प्रोडक्शन करेगा। रेलवे ने राज्य सरकार से 27 साल के लिए जमीन लीज पर लिया है। जिसमें दो साल निर्माण कार्य और 25 साल उत्पादन होना है। यहां लगभग सोलर पैनल के 27,600 कॉलम में 1,54,560 सोलर मॉड्यूल लगाए जाएंगे।
310 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा सोलर प्लांट
सोलर प्लांट में 4 इनवर्टर और 4 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। तीन इनवर्टर 15.8-15.8 मेगावाट के होंगे। एक इनवर्टर 2.60 मेगावाट का होगा। इसी तरह तीन बड़े और एक छोटा ट्रांसफार्मर भी लगाया जाएगा। इससे बिजली के पारेषण और वितरण का काम किया जाएगा। सोलर मॉड्यूल को 18 डिग्री पर रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक सूर्य की किरणों का अवशोषण हो सकेगा।
अगले 25 साल में 360 करोड़ रुपए की होगी बचत
रेल मंडल ने कम्पनी को 25 साल के लिए काम दिया है। इससे रेलवे को 360 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है। वर्तमान में रेलवे को ऊर्जा विभाग से बिजली लेने में प्रति यूनिट करीब 4.50 रुपए पड़ रही है। सोलर पावर प्लांट लगने से प्रति यूनिट 2.09 रुपए की लागत आएगी। इससे प्रति यूनिट लगभग 1.70 रुपए की बचत होगी। इस तरह इससे करोड़ों रुपए की बचत होगी। इसे लेकर पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया गया।
ग्रीन एनर्जी से बिजली पर खर्च होगा कम, पॉवर ग्रिड करेगा वितरण
रेल मंडल रायपुर के सीनियर डीसीएम विपिन वैष्णव के अनुसार “सोलर प्लांट की स्थापना से रेलवे को ग्रीन एनर्जी मिलेगी। इससे खर्च भी कम होगा। इससे मिलने वाली बिजली का उपयोग पहले ट्रैक्शन में किया जाएगा। फिर रेलवे के अन्य उपक्रमों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। सोलर पैनल से कुम्हारी पावर ग्रिड को बिजली दी जाएगी। फिर यहां से रेल्वे को सप्लाई होगी।”
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