जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़। पंचायत सचिव ग्राम पंचायत का मुख्य शासकीय अधिकारी होता है। पँचायत प्रस्ताव बनाने में ग्राम पंचायत की मदद करता है। सचिव ही ग्राम पंचायत में होने वाले लिपिकीय कार्यों और धन का लेखा जोखा रखने का काम करता है। ऑडिट के लिए इस लेखे जोखे को मुहैया कराता है। उसे पंचायत कार्यालय का प्रभारी भी कहा जाता है। पंचायत सचिव मूल रूप से सरकार और ग्राम पंचायत के बीच की कड़ी है। उसका काम ग्राम पंचायत की ओर से पारित प्रस्तावों का रिकार्ड रखना और उनके क्रियान्वयन में मदद करना भी है। लेकिन जब वही अपने कार्य के प्रति गम्भीर और पारदर्शी न हों और उसी के सरपंच और पंच उनके खिलाफ शिकायत पर उतारू हो जाएं तो यह उक्त पंचायत और ग्रामीणों के लिए सही संकेत नही है।

हम बात कर रहे हैं सारंगढ़- बरमकेला के मध्य में स्थित ग्राम पंचायत मल्दा(ब) की जहां सरपंच और पंचों ने अपने सचिव लोकेश चन्द्र की लिखित शिकायत जनपद सीईओ से की गई है।
लिखित शिकायत के अनुसार-
ग्राम पंचायत मल्दा (ब) के सचिव लोकेश चंद्र पटेल द्वारा पंचायत के आय व्यय एवं 15 वे वित्त के राशि को गोपनिय रखा जाता है। पंचायत बैठक मे हिसाब पूछे जाने पर टाल मटोल किया जाता है, जिसके कारण पंचायत पदाधिकारियो मे रोष व्याप्त है। सचिव द्वारा पंचायत पदाधिकारियो के प्रति दुर्व्यवहार किया जाता है जिसका विवरण निम्नानुसार है-

1.सचिव लोकेश चन्द्र पटेल द्वारा सरपंच आशा चौहान को आज पर्यन्त तक पंचायत रिकार्ड का चार्ज नही दिया गया है।
2.पंच सरपंच को राज्य सरकार द्वारा दिये जाने वाले भत्ते जो कि
दीपावली के पहले जमा हो गया था जिसे सरपंच द्वारा सभी को भुगतान करने हेतु सचिव को कहा गया तो अभद्र व्यवहार करते हुये भुगतान नही किया गया।
3.सचिव अपने कार्यालय एवं पंचायत मुख्यालय में कभी नही रहता, न ही मासिक बैठक लिया जाता है। सचिव के मुख्यालय मे नही रहने से निर्माण कार्य करने एवं फाइल तैयार करने में विलंब होता है जिसके कारण समय सीमा पर कार्य नहीं हो पाता। उदाहरण के लिये 2018-19 मे स्वीकृत पुलिया निर्माण का कार्य वर्तमान समय तक अधूरा पड़ा है। जिसका सोकाश नोटिस जिला कार्यालय द्वारा सचिव को जारी किया गया था।

देवेन्द्र नायक द्वारा सहकारी सोसायटी मे चबुतरा निर्माण के कार्य मे बालू ईट का ढलाई कार्य किया गया था जिसका एकमुश्त रकम 70000/-रू0 था जो राशि सहकारी सोसायटी मल्दा ब द्वारा चेक के माध्यम से दिया गया उस रकम को पंचायत खाता मे जमा कर भुगतान करना था। हितग्राही द्वारा रकम मांगने पर टालमटोल करने पर आज तक उसे भुगतान नही किया जबकि सरपंच आशा चौहान से चेक मे हस्ताक्षर करवा लिया गया था।
अतः सरपंच के अगुवाई में पंचों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक बैनर्जी से लिखित शिकायत में कहा है कि लापरवाह सचिव के प्रति कार्यवाही करते हुये अन्य सचिव को ग्राम पंचायत मल्दा व में पदस्थ करने की मांग की गई है जिससे पंचायत का कार्य सुचारू ढंग से चल सके। अब देखना दिलचस्प होगा कि अभिषेक बैनर्जी जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर गौर करते हैं। या अपने अधिनस्त कर्मचारी पर शिकायत को अनदेखा करते हैं।
सचिव लोकेश चन्द्र पटेल नही उठाये फोन-
जब हमने सचिव से उनका पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया तो साहब फोन नही उठाये और दुबारा में काट दिए। इससे उनके रवैये की झलक मिलती है।
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