वन अधिकार पट्टाधारियों के संवर्धन के लिए उठाये जा रहे महत्वपूर्ण कदम रायगढ़ जिले में विभागीय योजनाओं के माध्यम से आजीविका गतिविधियों को दिया जा रहा बढ़ावा

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रायगढ़/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आदिवासियों के हितों के संरक्षण, वन निर्भर समुदायों की वन आधारित आजीविका को समृद्ध बनाकर, आदिवासी अधिकारों व अस्मिता का मान रखते हुए वन के साथ सहजीवी रिश्ता बनाये रखने, प्रदेश में मनुष्य एवं प्रकृति के मध्य द्वन्द को नियंत्रित करने तथा प्रदेश की जैव-विविधता, जल स्त्रोत, वन्य जीव और वनों को संरक्षित रखने, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से निपटने के लिये तथा वन संसाधनों के लोकतांत्रिक प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन अधिकार अधिनियम 2006 को प्राथमिकता से क्रियान्वित किया जा रहा है। आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों को जंगल पर उनके

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अधिकारों को मान्यता देने के लिये 2006 में अनुसूचित जनजाति और परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों के मान्यता) कानून को पूरे देश में लागू किया गया है। प्रदेश में 13 दिसम्बर 2005 से पहले वन क्षेत्र में काबिज वनवासियों को वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत लाभ दिया जा रहा है। इसमें वनक्षेत्र में निवास करने वाले ग्रामीणों को शासन द्वारा व्यक्तिगत और सामुदायिक पत्र का वितरण किया जा रहा है।
रायगढ़ जिला अंतर्गत वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन द्वारा व्यक्तिगत वन अधिकार के तहत 13 हजार 28 वन अधिकार पत्र हेतु 7400.118 हेक्टेयर भूमि का वितरण किया गया है तथा कुल 736 ग्रामों को विभिन्न सामुदायिक प्रयोजनों जैसे-निस्तार, चारागाह, जैव विविधता, लघु एवं गौण वनोपज संग्रहण, जलाशय के अन्य उत्पाद, श्मशान, देवस्थल हेतु ग्रामसभा के नाम से कुल 5 हजार 159 सामुदायिक वन अधिकार पत्र जिनका क्षेत्रफल 62348.323 हेक्टेयर है तथा वनों पर आश्रित समुदायों को ग्रामसभा के नाम से 295 ग्रामों को कुल 295 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र सामुदायिक वन संसाधनों की संरक्षा, पुनरुज्जिवित करने, परिरक्षित करने तथा प्रबंध करने हेतु 146223.824 हेक्टेयर भूमि पर अधिकार दिया गया है।

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वन अधिकार पत्रों के वितरण के पश्चात् एफआरए हितग्राही को विभिन्न योजनाओं का लाभ देने हेतु वन अधिकार पत्र पुस्तिका का वितरण किया जा रहा है। जिससे शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। वन पट्टाधारियों के आय संवर्धन एवं जीवन स्तर में सुधार हेतु विभिन्न आजीविकावर्धक विभागों के कन्वर्जेन्स से संचालित कार्य किये जा रहे है। जिसमें महात्मा गांधी नरेगा एवं डी.एम.एफ के अभिसरण से चयनित एफआरए क्लस्टर में भूमि समतलीकरण एवं मेढ़ बंधान, चैन लिंक तार फेंसिंग एवं गेट निर्माण कार्य, वर्किंग शेड निर्माण, मिट्टी मुरुम सड़क निर्माण, सिंचाई हेतु डबरी, कुआँ निर्माण एवं बोर खनन, सोलर पम्प, ड्रिप स्प्रिंकलर, सर्कुलेशन टैंक निर्माण, बकरी शेड, मुर्गी शेड, गाय कोठा निर्माण के द्वारा 110 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। उक्त कार्यों हेतु मनरेगा एवं डीएमएफ द्वारा कुल 01 करोड़ 91 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई है।

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वन विभाग द्वारा वन धन योजना से लघु वनोपज प्रसंस्करण/एमएसपी से लघु वनोपज खरीदी के तहत-661 हितग्राही, शहीद महेंद्र कर्मा सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत-05 हितग्राही, फलदार पौध रोपण से-171 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा डीजल पम्प सेट/स्प्रिंकलर सेट वितरण के तहत-06 हितग्राही, पौध संरक्षण यंत्र वितरण/कृषि यंत्र वितरण-1848 हितग्राही, नि:शुल्क बीज मिनी किट वितरण-1501 किट, रागी/दलहन तिलहन फसल प्रदर्शन से-478 हितग्राही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से-15 हजार 16 हितग्राही, फसल बीमा योजना से-595 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पशुधन विभाग द्वारा 25 हितग्राहियों को बकरी इकाई वितरण किया गया है। उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित आम नवीन रोपण/पोषण बाड़ी/एनएचएम सब्जी एवं काजू क्षेत्र विस्तार योजना/डी.एम.एफ. सब्जी मिनीकिट वितरण के तहत-555 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। सहकारिता विभाग द्वारा कुल 3700 हितग्राहियों को केसीसी वितरण कर 01 करोड़ 64 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया गया है तथा पिछले खरीफ के मौसम में 277 एफआरए हितग्राहियों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई है। क्रेडा विभाग द्वारा सौर सुजला योजना अंतर्गत सोलर पम्प स्थापित कर 04 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा नील क्रांति योजना अंतर्गत मछली पालन हेतु 02 तालाब का निर्माण किया गया है। लोगों के जीवन पर वन अधिकार अधिनियम का प्रभाव प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है जिसमें वन अधिकार पत्र प्राप्त होने से पीढिय़ों से आजीविका हेतु उपभोग कर रहे भूमि पर किसी और के अधिकार होने का डर ख़त्म हुआ है। वन अधिकार पत्र मिलने से विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जैसे-भूमि समतलीकरण से उत्पादन में वृद्धि, समर्थन मूल्य पर धान बिक्री से आय में वृद्धि, ऋण मिलने से कृषि कार्य हेतु आवश्यकताओं की पूर्ति की जा रही है। विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर जीवन स्तर में सुधार एवं आय में वृद्धि से समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हुआ है तथा उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सामुदायिक वन अधिकार/सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र मिलने से ग्राम के सीमाओं के भीतर परंपरागत रूप से वन भूमि एवं वन्य उपजों का उपभोग कर रहे समुदायों को वनोपज संग्रहण का अधिकार, वनों को संरक्षित करने का अधिकार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार वन संसाधनों के लोकतांत्रिक प्रशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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