सारंगढ़। नगर के हृदय स्थल नंदा चौक में पिछले कई सप्ताह से बीमार पड़ी गौ माता ने आखिरकार 4 अक्टूबर 2026 को दम तोड़ दिया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रही गौ माता की हालत देखकर स्थानीय गौसेवकों और समाजसेवियों ने अपने स्तर पर इलाज, भोजन और देखभाल की भरपूर कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
गौ माता की सेवा में जुटे युवा गौसेवक अमन यादव ने दवाई, भोजन-पानी और देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी सतीश यादव बल्ला ने भी तन-मन-धन से गौ माता की सेवा और उपचार में सहयोग किया। स्थानीय लोगों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार उसकी देखभाल की।
इसी बीच युवा समाजसेवी एवं अधिवक्ता अनुरोध पटेल ने सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए नंदा चौक में बीमार पड़ी गौ माता के उपचार और सेवा की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ में शुरू हुई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से भी गौ माता के इलाज और उचित देखभाल की गुहार लगाई। इसके बावजूद समय रहते पर्याप्त उपचार और चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।
गौ माता की मौत के बाद नंदा चौक का माहौल गमगीन नजर आया। यहां से गुजरने वाले लोगों ने सड़क किनारे मृत पड़ी गौ माता को देखकर दुख जताया। गौसेवकों ने मृत गौ माता के अंतिम संस्कार की तैयारी करने की बात कही है।
युवा समाजसेवी एवं अधिवक्ता अनुरोध पटेल ने गौ माता की मौत पर दुख जताते हुए प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिले में पशु चिकित्सालय होने के बावजूद बीमार और घायल पशुओं को समय पर उपचार दिलाने के लिए पर्याप्त आपातकालीन व्यवस्था और एंबुलेंस की सुविधा का अभाव चिंता का विषय है। उनके अनुसार यदि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती तो शायद गौ माता को बचाने का प्रयास और प्रभावी हो सकता था।
अनुरोध पटेल ने क्षेत्र की गौशालाओं की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा गौसेवा के लिए अनुदान दिया जाता है, ऐसे में सड़क पर बीमार और बेसहारा गौवंश के उपचार एवं संरक्षण के लिए भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नंदा चौक पर कई लोग पहुंचे, लेकिन बीमार गौ माता के उपचार के लिए अपेक्षित स्तर पर पहल नहीं हो सकी।
गौ माता की मौत ने एक बार फिर सारंगढ़ में बेसहारा और बीमार गौवंश की देखभाल, पशु चिकित्सा सुविधा तथा आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन संबंधित विभागों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे भविष्य में किसी बीमार या घायल पशु को उपचार के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े।


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