अजा एकादशी का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. यह भाद्रपद की पहली एकादशी है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिसमें आपके किए गए कार्य सफल होते हैं.
जो लोग अजा एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके सभी कष्ट मिट जाते हैं, राजा के समान सुख प्राप्त होता है. हरि कृपा से स्वर्ग की प्राप्ति होती है.
अजा एकादशी 2026 तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 07:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा.
सर्वार्थ सिद्धि योग में अजा एकादशी
इस बार की अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 06 बजकर 14 मिनट पर बनेगा और यह अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. व्रत वाले दिन प्रात:काल से लेकर सुबह 06:41 ए एम तक व्यतीपात योग है, उसके बाद से वरीयान् योग बनेगा, जो 8 सितंबर को तड़के 03:38 ए एम तक है, फिर परिघ योग होगा.
अजा एकादशी 2026 मुहूर्त
यदि आपको अजा एकादशी का व्रत रखना है तो पूजा का मुहूर्त सुबह में 06:02 ए एम से 07:36 ए एम तक है, उसके बाद सुबह में 09:10 ए एम से 10:45 ए एम तक है. इस समय में आप भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं. उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:54 ए एम से दोपहर 12:44 पी एम तक है.
अजा एकादशी व्रत का पारण
इस व्रत का पारण 8 सितंबर मंगलवार को सुबह में 6 बजकर 2 मिनट से कर सकते हैं. पारण का समय सुबह 8 बजकर 33 मिनट पर खत्म हो जाएगा. उस दिन द्वादशी तिथि का समापन दोपहर में 02 बजकर 42 मिनट पर होगा.
अजा एकादशी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने अपना सब राजपाट, पत्नी, पुत्र, धन, दौलत सब खो दिया. स्वयं को भी बेचा. चांडाल के यहां नौकरी करनी पड़ी. जब उन्होंने अजा एकादशी का व्रत किया तो भगवान विष्णु की कृपा से उनके सभी पाप और कष्ट मिट गए. उनको राजपाट, पत्नी, पुत्र सबकुछ फिर से प्राप्त हो गया. मृत्यु के बाद उनको स्वर्ग में स्थान मिला. जो लोग यह व्रत करते हैं, उनके भी दुख, पाप मिटते हैं, राजसुख प्राप्त होता है और मृत्यु बाद स्वर्ग में स्थान मिलता है.
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