सारंगढ़-बिलाईगढ़, 17 अगस्त 2026। ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के 48 ऐसे स्कूलों में बालिका शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है, जहां छात्राओं के लिए पृथक शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विकसित भारत जीरामजी (विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) के माध्यम से इन कार्यों के लिए कुल 206 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वच्छता की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उनके लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण तैयार करना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार अभियान के तहत जिले के ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है।

तीन विकासखंडों के 48 स्कूल शामिल
कलेक्टर पदमिनी भोई साहू के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी के मार्गदर्शन में बालिका शौचालय निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। विकासखंडवार देखें तो सारंगढ़ में 9, बिलाईगढ़ में 20 और बरमकेला में 19 स्कूलों का चयन किया गया है। इस प्रकार जिले के कुल 48 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में बालिका शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है।
ले-आउट के बाद शुरू हो रहा निर्माण
चयनित विद्यालयों में तकनीकी सहायकों द्वारा स्थल निरीक्षण कर आवश्यक ले-आउट तैयार किया जा रहा है। ले-आउट के बाद संबंधित स्थलों पर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर छात्राओं को जल्द से जल्द सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।
गुणवत्ता से समझौता नहीं
शौचालयों का निर्माण योजना के निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जाएगा। निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। कलेक्टर पदमिनी भोई साहू ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और गुणवत्तापूर्ण एवं सुविधायुक्त शौचालय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित निर्माण एजेंसी तथा जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बालिकाओं की सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता
जिले में शुरू की गई यह पहल महज शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यालयों में बालिकाओं के लिए स्वच्छता, सुविधा, सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 48 स्कूलों में पृथक बालिका शौचालय बनने से छात्राओं को दैनिक आवश्यकताओं के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी और विद्यालयों का वातावरण उनके लिए अधिक अनुकूल बनेगा।
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