सारंगढ़। संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया। इस दिवस का उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग किसी पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके पास जीवन का लंबा अनुभव है, जो नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

बरगद की तरह देते हैं सबको छांव
बुजुर्गों को बरगद के पेड़ से जोड़ते हुए कहा गया कि जिस तरह बरगद की जड़ें गहरी होती हैं और वह स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया देता है, उसी तरह बुजुर्ग अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार के लिए समर्पित कर देते हैं। छत्तीसगढ़ी में बुजुर्गों को ‘सियान’ कहा जाता है। पहले गांव की पंचायतों में सियान की बात को विशेष महत्व दिया जाता था, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में कई जगह बुजुर्गों के अनुभव और उनकी जरूरतों की उपेक्षा देखने को मिल रही है।
मोबाइल के दौर में अकेले हो रहे बुजुर्ग
आज कई बुजुर्ग अपने ही घर में अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। परिवार के सदस्य मोबाइल और अन्य व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं। वहीं उम्र बढ़ने के साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय संबंधी परेशानी, घुटनों और जोड़ों का दर्द, नींद की समस्या, याददाश्त में कमी तथा देखने-सुनने और चलने-फिरने जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं।
हर गुरुवार ‘सियान जतन क्लिनिक’
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बुजुर्गों के स्वास्थ्य और कल्याण को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गुरुवार जिला एवं सामुदायिक स्तर पर ‘सियान जतन क्लिनिक’ संचालित किए जाने की जानकारी दी गई। यहां बुजुर्गों की नियमित स्वास्थ्य जांच, बीपी, शुगर, हृदय, घुटने, आंख, नाक और कान से संबंधित जांच के साथ योग एवं आयु संबंधी परामर्श की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
70 वर्ष से अधिक उम्र वालों को आयुष्मान वय वंदना का लाभ
70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना कार्ड के माध्यम से निर्धारित पात्रता के अनुसार स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही अकेलेपन, अवसाद, नींद की कमी जैसी समस्याओं पर काउंसलिंग, टेलीमेडिसिन और भजन-कहानी जैसी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य एवं याददाश्त को बेहतर रखने पर भी जोर दिया गया।
‘सियान गुड़ी’ में मनोरंजन से लेकर अपनापन तक
बुजुर्गों के लिए ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर केंद्र की अवधारणा के तहत भोजन, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। बच्चों के साथ खेल, नाटक, पेंटिंग और संवाद जैसी गतिविधियों से बुजुर्गों को सक्रिय एवं सामाजिक रूप से जोड़े रखने पर बल दिया गया।
बुजुर्गों के अधिकारों की भी दी जाए जानकारी
वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन, आधार, बैंकिंग, संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत पात्र माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। संपत्ति सेवा की शर्त पर हस्तांतरित किए जाने और बाद में उचित देखभाल नहीं होने की स्थिति में कानून के तहत राहत की संभावनाओं के बारे में भी जागरूकता जरूरी है।
घर तक पहुंचे मदद 14567 हेल्पलाइन
बुजुर्गों को किसी प्रकार की समस्या होने पर जिला समाज कल्याण विभाग, एसडीएम, पुलिस तथा वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन 14567 से सहायता लेने की अपील की गई। एमएमयू, मितानिन और बुजुर्ग मित्रों के माध्यम से घर तक दवा एवं आवश्यक सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सियान को फिर समाज से जोड़ने की पहल
सक्षम और अनुभवी बुजुर्गों को बच्चों की पढ़ाई में सहयोग, खेती-किसानी की सलाह तथा अपने अनुभव साझा करने जैसी गतिविधियों से नई पीढ़ी से जोड़ने का सुझाव दिया गया। प्रत्येक बुजुर्ग के साथ एक ‘वय-मित्र’ जोड़ने और उनकी दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई गई।
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