सारंगढ़-बिलाईगढ़, 17 अगस्त 2026। जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत चयनित 175 आंगनबाड़ी केन्द्रों में जुलाई 2026 तक 88 बच्चे कुपोषण से बाहर निकलकर सुपोषित श्रेणी में पहुंच चुके हैं। यह उपलब्धि प्रशासन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संस्थाओं और परिवारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
कुपोषण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए जून 2026 में पोषण ट्रैकर एप पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर जिले के करीब 200 आंगनबाड़ी केन्द्रों का प्रारंभिक रूप से चिन्हांकन किया गया। पर्यवेक्षकों के सत्यापन के बाद 175 आंगनबाड़ी केन्द्रों की अंतिम सूची तैयार की गई। इन केन्द्रों में कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी जिले में पदस्थ अधिकारियों को सौंपी गई।

अधिकारियों ने बच्चों की स्थिति की नियमित जानकारी लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पालकों को पोषण संबंधी आवश्यक परामर्श दिया। वहीं सर्वाधिक कुपोषित बच्चों वाले 15 आंगनबाड़ी केन्द्रों को विशेष निगरानी में रखा गया और इनकी मॉनिटरिंग का दायित्व रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपा गया।
रेडक्रॉस सोसायटी एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा चिन्हित केन्द्रों का नियमित निरीक्षण किया गया। बच्चों की पोषण स्थिति की समीक्षा के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पालकों को खान-पान एवं पोषण को लेकर मार्गदर्शन दिया गया। अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया, ताकि उन्हें समय पर बेहतर उपचार और पोषण मिल सके।
कुपोषण के खिलाफ अभियान को केवल आंगनबाड़ी केन्द्रों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि परिवार और समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई। सास-बहू सम्मेलनों के माध्यम से परिवार के सदस्यों को बच्चों के स्वास्थ्य, खान-पान और पोषण के प्रति जागरूक किया गया। बाल संदर्भ शिविरों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया गया। एनीमिया और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से लगातार कार्य किया जा रहा है।
अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि चयनित 175 आंगनबाड़ी केन्द्रों में जुलाई 2026 तक 88 बच्चे कुपोषण से बाहर निकलकर सुपोषित श्रेणी में पहुंच गए हैं। बच्चों की स्थिति में यह सुधार नियमित निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर उपचार, पोषण परामर्श और परिवारों की जागरूकता का परिणाम है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल कुपोषित बच्चों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ और सुपोषित बनाकर उसके बेहतर भविष्य की मजबूत नींव तैयार करना है। इसके लिए बच्चों की निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श, उपचार और फॉलोअप की प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
88 बच्चों का सुपोषित श्रेणी में पहुंचना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए बड़ी और उत्साहजनक उपलब्धि है। यह सफलता साबित करती है कि प्रशासन, मैदानी अमला, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संस्थाएं और परिवार एकजुट होकर प्रयास करें तो कुपोषण जैसी चुनौती के खिलाफ ठोस और सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
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