बरसात का मौसम आते ही इम्युनिटी कमजोर होने लगती है और सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। ऐसे में सुबह-सुबह तुलसी के पत्ते चबाना एक आम घरेलू नुस्खा माना जाता है। लेकिन क्या बारिश के दिनों में रोजाना खाली पेट तुलसी खाना आपकी सेहत के लिए सचमुच फायदेमंद है या इसके कुछ नुकसान भी हो सकते है।

तुलसी को आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है। धार्मिक दृष्टि से भी तुलसी का विशेष महत्व है और हिंदू धर्म में इसकी पत्तियों का उपयोग पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और विभिन्न त्योहारों में किया जाता है। आयुर्वेदिक परंपरा में तुलसी का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर रखने, सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी परेशानियों में राहत देने और शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के लिए किया जाता है।
वर्धा आयुर्वेद एंड हर्बल मेडिसिन के संस्थापक डॉक्टर सुभाष गोयल ने बताया अगर रोज़ सुबह 8-10 तुलसी के पत्तों को इसकी चाय बनाकर या फिर चबाया जाए तो बॉडी का बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। बरसात के दिनों में इन पत्तियों का सेवन शरीर के लिए ढाल साबित होता है। ये पत्तियां बॉडी को डिटॉक्स करती है और लिवर की हेल्थ में सुधार करती है। अगर आप बरसात के दिनों में बॉडी को बीमारियों से बचाना चाहते हैं, सूजन और दर्द को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप रोजाना तुलसी के पत्तों का सेवन करें। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इस मौसम में रोज तुलसी खाने से सेहत पर कैसा असर होता है।
तुलसी के औषधीय गुण
आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर पौधा माना जाता है। इसका सेवन पत्तियों, चाय, रस या सूखे पाउडर के रूप में किया जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें विटामिन C, कैल्शियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें यूजीनॉल और अन्य जैव सक्रिय यौगिक भी मौजूद होते हैं। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो बॉडी को हेल्दी रखने में मदद करते है।
खाली पेट तुलसी खाने के फायदे
सुबह खाली पेट तुलसी की कुछ पत्तियां चबाने को पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, खाली पेट तुलसी खाने के विशेष फायदे साबित करने के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
सर्दी-खांसी में तुलसी की चाय
बरसात के मौसम में अक्सर लोगों की इम्यूनिटी कम हो जाती है और उन्हें सर्दी खांसी बेहद परेशान करता है। ऐसे में तुलसी की चाय सर्दी-खांसी के दौरान गर्म पेय के तौर पर राहत दे सकती है। इसके कुछ यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो संक्रमण से बचाव करते हैं। लेकिन लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या संक्रमण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पाचन के लिए तुलसी
तुलसी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में पाचन संबंधी परेशानियों के लिए किया जाता रहा है। तुलसी से बनी चाय कुछ लोगों में गैस, पेट फूलने या अपच जैसी हल्की समस्याओं में राहत दे सकती है। हालांकि लिवर और ब्लैडर को डिटॉक्स करने का दावा वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
सूजन और तनाव में मददगार
तुलसी में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव पाए गए हैं। इसलिए यह शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते है। तुलसी को तनाव और मानसिक बेचैनी कम करने में भी उपयोग किया जाता है, लेकिन इसे तनाव या किसी मानसिक समस्या का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
फेफड़ों और सांस से जुड़ी समस्या
तुलसी की चाय का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सर्दी, खांसी और गले की परेशानी में किया जाता है। इसमें मौजूद यूजीनॉल जैसे यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। हालांकि, तुलसी टीबी या फेफड़ों के संक्रमण का इलाज नहीं करती। ऐसी बीमारियों में डॉक्टर से उपचार लेना जरूरी है।
जोड़ों के दर्द और सूजन में देती है फायदा
तुलसी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इसे जोड़ों की सूजन और दर्द के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन गठिया जैसी बीमारी का इलाज आप सिर्फ तुलसी से नहीं करें बल्कि डॉक्टर को दिखाएं।
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