सारंगढ़। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण मलाकार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने से प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। नोटिस जारी होने के बाद सारंगढ़-रायगढ़ सहित प्रदेश के कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पूर्व मंत्री उमेश नंदकुमार पटेल के समर्थकों में नाराज़गी देखी जा रही है।
समर्थकों का कहना है कि किसी भी नेता के पक्ष में अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसे अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि पार्टी के भीतर विचार रखना प्रत्येक कार्यकर्ता का अधिकार है।
पूर्व जिलाध्यक्ष अरुण मलाकार का कहना है कि उनके नेतृत्व में जिला कांग्रेस संगठन ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। उनके अनुसार, पहले कार्यकाल में जिले की सभी 5 में से 5 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरे कार्यकाल में 5 में से 4 सीटों पर कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। उनका दावा है कि उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बताया जा रहा है कि अरुण मलाकार ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “हम भी चाहते हैं कि हमारे जननेता उमेश नंदकुमार पटेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनें” तथा “कांग्रेस को मजबूत बनाओ अभियान” के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी। इसी पोस्ट को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि अरुण मलाकार नोटिस का क्या जवाब देंगे और प्रदेश कांग्रेस कमेटी उनके जवाब के बाद क्या निर्णय लेगी। फिलहाल इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।





