सारंगढ़ : सारंगढ़ की पावन माटी में उस वक्त हर किसी की आंखें नम और दिल भावुक हो उठा, जब डिजिटल दौर की सबसे नई पीढ़ी यानी ‘जेन अल्फा’ के नन्हें-मुन्हें बच्चों ने राजनीति और सरहदों की समझ से परे, सिर्फ और सिर्फ अपनत्व के धागे से बंधकर देश के प्रधानमंत्री के लिए अपने हाथ जोड़ दिए। मासूमियत जब प्रार्थना बन जाए, तो वह सीधे ईश्वर के दरबार तक पहुंचती है और सारंगढ़ में यही नजारा देखने को मिला, जब बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित किया।
घर के आंगन में मिट्टी का एक छोटा सा दीया टिमटिमा रहा था, और उसके चारों तरफ गोल घेरा बनाए बैठी थीं तीन नन्हीं रूहें—शिक्षा श्री, थिव्यांश और आद्या। जिनकी उम्र अभी ठीक से शब्दों को जोड़ने की भी नहीं है, जिनके होठों पर दुनियादारी का कोई बोझ नहीं, वे नन्हें बच्चे अपनी लड़खड़ाती और तोतली जुबां में पूरे जोश के साथ कह रहे थे- “मोदी जी स्वस्थ रहें, मोदी जी जिंदाबाद!”


उनकी तोतली बोली में छिपी यह असीम श्रद्धा और निश्छल प्रेम वहां मौजूद हर बड़े-बुजुर्ग के दिल को छू गया। मिट्टी के दीये की लौ में उन मासूम चेहरों की चमक और दोनों हाथ जोड़कर आंखें मूंदे प्रार्थना करते इन बच्चों को देखकर ऐसा लगा मानो साक्षात ईश्वर का कोई फरिश्ता देश के प्रधान सेवक के लिए आशीष मांग रहा हो। न कोई औपचारिकता, न कोई दिखावा, बस दिल से निकला एक शुद्ध और निस्वार्थ भाव।
यह दृश्य इस बात का सजीव प्रमाण है कि जब कोई नेता देश के लिए दिन-रात तपस्या करता है, तो उसका रिश्ता पीढ़ियों के बंधनों को तोड़कर सबसे नन्हें दिलों में भी जगह बना लेता है। सारंगढ़ में जला यह ‘आशीर्वाद का दीया’ सिर्फ मिट्टी और तेल का संगम नहीं, बल्कि भारत के सुनहरे भविष्य यानी हमारी नई पीढ़ी का देश के प्रति अटूट विश्वास और अपने प्रधानमंत्री के लिए अपार आत्मीयता का पवित्र प्रतीक बन गया।


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