सारंगढ़। शासकीय प्राथमिक शाला बंदरापारा में शिक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले प्रधान पाठक आत्माराम चौहान की मनमानी का आखिरकार अंत हो गया है। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू और लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर के सख्त रुख के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जे.आर. डहरिया ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

नदारद रहने का लगा ‘आदतन’ रोग-
जांच प्रतिवेदन में यह साबित हो चुका है कि महाशय बिना किसी सूचना के लंबे समय से अनधिकृत रूप से ड्यूटी से नदारद चल रहे थे। शासकीय कर्तव्यों की खुलेआम अनदेखी और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इस हिमाकत पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी चाबुक चलाई गई और उन्हें तत्काल प्रभाव से पदच्युत (बर्खास्त) कर दिया गया।
DEO की सख्त चेतावनी-
‘लापरवाही की कोई माफी नहीं’
मामले पर कड़ा संदेश देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी जे.आर. डहरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग में अनुशासन, जवाबदेही और नियमित उपस्थिति से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि “किसी भी स्तर पर पाई जाने वाली लापरवाही या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो काम नहीं करेगा वह कुर्सी पर नहीं रहेगा।”
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