सारंगढ़-बिलाईगढ़, 21 जून 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी “नमो ड्रोन दीदी” योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नए आयाम स्थापित कर रही है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के खोरीगांव की लखपति दीदी सुनीता पटेल इस योजना की सफलता की जीवंत मिसाल बनकर उभरी हैं। आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाते हुए उन्होंने न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि जिले सहित आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।
सुनीता पटेल को दिसंबर 2023 में ग्वालियर में 15 दिनों का विशेष ड्रोन प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2024 से वे लगातार किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक एवं नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग एक से दो लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए वे आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना छोटे और बड़े सभी किसानों की खेती में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सहयोग कर रही हैं।
उन्हें इफको उर्वरक कंपनी की ओर से कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया है। वे विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों, कृषि मेलों और कार्यशालाओं में ड्रोन का प्रदर्शन कर किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को इसकी उपयोगिता से अवगत कराती हैं। शनिवार को सारंगढ़ कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित खेती बचाओ अभियान एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में उन्होंने ड्रोन तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया। राजस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा की उपस्थिति में पानी से भरे ड्रोन द्वारा छिड़काव कर आधुनिक कृषि तकनीक की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित किसानों और महिलाओं ने काफी सराहा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनी योजना
“नमो ड्रोन दीदी” योजना का उद्देश्य कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थायी आय का अवसर उपलब्ध कराना है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत महिला समूहों और उनके क्लस्टर स्तरीय संघों को ड्रोन सेवा प्रदाता के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा नैनो उर्वरकों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
15 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण
योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 15 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें 5 दिन ड्रोन पायलट प्रशिक्षण तथा 10 दिन पोषक तत्व एवं कीटनाशक छिड़काव का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होता है। ड्रोन सहायक के लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण का भी प्रावधान है। प्रशिक्षण का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जाता है और महिलाओं को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ता।
इफको की महत्वपूर्ण भूमिका
इफको किसानों और महिला समूहों तक कृषि ड्रोन पहुंचाने के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी प्रदान कर रही है। चयनित स्वयं सहायता समूह की दो महिलाओं को ड्रोन संचालन एवं रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। सफल प्रशिक्षण के बाद डीजीसीए से रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (आरपीसी) जारी किया जाता है और समूह को ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है।
स्वयं ड्रोन खरीदने की भी सुविधा
18 वर्ष से अधिक आयु की, 10वीं उत्तीर्ण और स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। योजना के तहत ड्रोन खरीदने के लिए 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। शेष राशि कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के माध्यम से रियायती ब्याज पर ऋण के रूप में प्राप्त की जा सकती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं स्वयं ड्रोन संचालित कर स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं।
आज सुनीता पटेल केवल एक सफल “ड्रोन दीदी” ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक पहचान बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण मिले तो गांव की महिलाएं भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती हैं।

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