रायगढ़-ग्रामीणों की लापरवाही पड़ रही है भारी…गुपचुप तरीके से शादी, और अन्य कार्यक्रम की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में तेज़ी से पांव पसार रहा कोरोना…!
रायगढ/कोरोना संक्रमण स्तर अब शहर से निलककर गांव की तरफ तेजी से बढ़ने लगी है। ग्रामीणों की लापरवाही चरम स्तर में होने से संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। आलम यह है कि सारंगढ,बरमकेला, लैलूंगा और पुसौर ब्लाक के दर्जनों गांव ऐसे है जहां संक्रमण भयावह स्थिति पर पहुच चुकी है लोगो की जान को असमय कोरोना लील चुकी है।
फिलहाल राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम बनाकर गांव में बढ़ते संक्रमण के मामले आने से रोकने की दिशा में लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या कराने के साथ गाइडलाइन्स के पालन और जन जागरूकता कार्यक्रम के जरिए प्रयासरत हैं। इससे संक्रमण की रफ्तार कम करने में काफी मदद मिली है।
वहीं कुछ ऐसे गांव भी हैं, जहां की लापरवाही से कई मामले सामने आए है, शहरों के साथ विशेषकर गांवों में संक्रमण को रोकने के लिए सामूहिक जागरूकता के साथ आत्मानुशासन बहुत जरूरी है। हर किसी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सभी को सजग और सतर्क रहना होगा।
सामाजिक आयोजनों में भीड़ बनी भयावह-
जिले में लाक डाउन के 5 वें सप्ताह में शादी दशकर्म व अन्य आयोजन में लोग गुपचुप तरीके से करने में लगे है, इन्हें अन्य लोगों की परवाह ही नही है..! हालांकि ऐसे लोगो की भनक लगते ही पुलिस टीम पहुच कर कानूनी पाठ पढ़ाते हुए आपदा प्रबंधन के तहत जुर्म दर्ज कर सबक भी सीखा रही है लेकिन इसके बाद भी लोग सतर्क और सजग नही हो रहे है। ऐसे ही कई प्रकरण जिले भर में आ चुके है।
पँचायत और ग्राम कोटवार की भूमिका भी संदिग्ध-
ग्रामीण अंचल में खुलेआम अगर कोई शादी या अन्य कार्य्रकम हो और सरपँच या ग्राम कोटवार को इसकी भनक तक न लगे ये हास्यपद लगता है। लेकिन किसी विरादरी या परिवार को रुष्ट न कर मौन सहमति देने वाले गाँव के मुखिया पर कानूनी कार्यवाही न होना भी गैरवाजिब है। ग्राम कोटवार जिसे गाँव की वस्तुस्तिति को तत्काल एसडीएम और सम्बंधित थाने में सूचना कराने का दायित्व होता है वो भी झूठे बड़प्पन दिखा कर ऐसे आयोजनों पर अपनी सहमति दे देते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
फिलहाल कोरोना का दूसरा लहर अभी ढलान पर है लेकिन ग्रामीणों की लापरवाही कहीं फिर से स्थिति को भयावह न कर दे…!
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