सारंगढ़। तपती गर्मी और उमस के बीच सारंगढ़ के मौसम ने अचानक करवट बदली है। क्षेत्र में गरज-चमक के साथ हुई झमाझम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने जहाँ एक ओर तापमान में भारी गिरावट दर्ज कर लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर इस बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

सफेद चादर में लिपटा शहर
आज दोपहर बाद अचानक आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ ही बड़े आकार के ओले गिरने लगे, जिससे सड़कों और खेतों में सफेद चादर बिछ गई। ओलावृष्टि इतनी जबरदस्त थी कि लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। इस प्राकृतिक बदलाव से तापमान में 5 से 7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम खुशनुमा और ठंडा हो गया है।
किसानों की उम्मीदों पर ‘पानी’ और ‘पत्थर’
मौसम का यह सुहाना मिजाज किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। इस समय खेतों में गेहूं समेत रबी की फसलें तैयार खड़ी हैं, जिन्हें ओलावृष्टि से भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है। ओलों की मार से फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है।
आम की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा
खास तौर पर बागवानी फसलों, विशेषकर आम के बागानों के लिए यह मौसम विनाशकारी साबित हो रहा है। इस समय आम के पेड़ों पर बौर (फूल) आए हुए हैं। विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि तेज बारिश और ओलों की वजह से आम के बौर झड़ रहे हैं। यदि ओला वृष्टि का असर ज्यादा रहा, तो इस साल आम की पैदावार आधी रह सकती है, जिससे बागवानों को बड़ा आर्थिक झटका लगेगा।
आगामी दिनों का अनुमान
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले 24 घंटों में क्षेत्र में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बना रखी है ताकि फसल नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
जहाँ आम जनता ठंडी हवाओं का लुत्फ उठा रही है, वहीं अन्नदाता अब सरकार और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए देख रहा है कि उनके नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
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