सारंगढ़/सरसींवा:
एक तरफ सूबे में कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरसींवा थाना क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम बालपुर में एक परिवार को कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण करने और बात न मानने पर जिंदा जला देने व घर फूंकने की धमकी दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता द्वारा कलेक्टर से लेकर पुलिस कप्तान तक न्याय की गुहार लगाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पीड़ित परिवार आज भी दहशत के साये में जीने को मजबूर है।

‘प्रभु के दास’ बनो, वरना भुगतना होगा अंजाम-

कलेक्टर जनदर्शन और पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम बालपुर निवासी भेषबाई पति टीकाराम खुटे ने गांव के ही सूर्य कुमार सायतोड़े और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी पक्ष द्वारा पीड़ित परिवार पर ‘कैलिसिया’ (प्रार्थना सभा) में जाने और आगामी सर्वे में खुद को ईसाई दर्ज कराने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि जब पीड़ित परिवार ने अपनी संस्कृति और धर्म छोड़ने से मना किया, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
झोपड़ी जलाने और जेल भिजवाने की कथित धमकी-
पीड़िता भेषबाई का आरोप है कि मना करने पर आरोपी सूर्य कुमार सायतोड़े आग बबूला हो गया। उसने धमकी दी है कि वह तहसीलदार के पास अतिक्रमण की झूठी शिकायत कर उन्हें जेल भिजवा देगा। इतना ही नहीं, पीड़िता ने आशंका जताई है कि उनके रोजी-रोटी के एकमात्र साधन (ठेले/झोपड़ी) को आग के हवाले करने और पड़ोसियों को भड़काकर मारपीट कराने की साजिश रची जा रही है।
सरसींवा थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली ‘संदेह’ के घेरे में?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू सरसींवा पुलिस की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ है। सूत्रों और शिकायत के मुताबिक, इस मामले में एक पूर्व विधायक के रसूख और राजनीतिक दबाव की चर्चाएं गर्म हैं। आरोप लग रहे हैं कि इसी ‘सियासी दहशत’ के चलते सरसींवा थाना प्रभारी धर्मांतरण के इस गंभीर खेल पर हाथ डालने से कतरा रही हैं।
पीड़ित परिवार ने साफ कहा है कि
“अगर भविष्य में हमारे या हमारे परिवार के साथ कोई भी अप्रिय घटना या अनहोनी होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उक्त आरोपी व्यक्तियों और प्रशासन की होगी।”
बड़ा सवाल-
जब सूबे के मुखिया धर्मांतरण और गुंडागर्दी पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं, तो सारंगढ़ में पीड़ितों की फाइलों पर धूल क्यों जम रही है? क्या रसूखदारों के दबाव में सरसींवा पुलिस किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतजार कर रही है? अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत के बाद पुलिस कप्तान और कलेक्टर महोदय क्या एक्शन लेते हैं।
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