नरेंद्र मोदी और विष्णु देव साय के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक चेतना को नई पहचान मिल रही है। यह बात जिला भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष बैजंयती नंदराम लहरे ने सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कही।
सारंगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बैजयंती नंदू लहरे ने कहा कि आज से 75 वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ था और इस ऐतिहासिक दिवस को पूरे देश में “स्वाभिमान पर्व” के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन आस्था, संस्कृति और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इतिहास में सोमनाथ मंदिर पर कई बार विदेशी आक्रांताओं द्वारा हमले किए गए। विशेष रूप से महमूद गजनवी द्वारा बार-बार किए गए आक्रमणों के बावजूद मंदिर की आस्था और सनातन संस्कृति को समाप्त नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि प्रथम आक्रमण के समय मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने मंदिर नहीं छोड़ा और अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म और संस्कृति की रक्षा की। उनका यह बलिदान आज भी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
बैजयंती लहरे ने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उस समय देश के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने तमाम विरोधों के बावजूद सोमनाथ पहुंचकर पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लिया था, जो भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को नया गौरव प्राप्त हुआ है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेश के वृद्धजनों को धार्मिक यात्राएं कराई जा रही हैं, जिससे समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत हो रहा है।

