फर्सवानी मे शराबबंदी कराने गये टीम के साथ मारपीट…फर्सवानी में नशामुक्ति अभियान फेल…!महिलाओं को मिल रही जान से मारने की धमकी…
सारंगढ़-बिलाइगढ़ | जिले के सारंगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत फर्सवानी से कानून और व्यवस्था को तार-तार कर देने वाली एक बेहद शर्मनाक और खौफनाक खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ राज्य सरकार नशामुक्ति को बढ़ावा दे रही है, वहीं फर्सवानी में सत्ता के रसूखदार और शराब माफिया मिलकर गांव के भविष्य को महुआ शराब के जहर में डुबो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि अवैध शराब के काले कारोबार का विरोध करने पर माफियाओं ने गाँव के एक व्यक्ति को सरेराह पीटा और अब उन्हें परिवार सहित “खत्म” करने की धमकियां दे रहे हैं।
ग्राम पंचायत का ‘पंच’ ही निकला आरोपी-
थाने में सौंपे गए नामजद लिखित आवेदन (शिकायत पत्र) ने एक बड़ा खुलासा किया है। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि अवैध शराब के इस पूरे काले साम्राज्य को कोई और नहीं, बल्कि गांव के ही पंच रमेश सिदार और उनका परिवार संचालित कर रहा है। यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जब कानून का रखवाला ही कानून तोड़ने लगे, तो आम जनता की रक्षा कौन करेगा?
शिकायत पत्र में आरोपियों की एक पूरी सूची दी गई है, जो इस प्रकार है रमेश सिदार (पंच) पिता शुकराम सिदार (मुख्य आरोपी),अहिल्या सिदार पति रमेश सिदार, विकास सिदार, तेजराम यादव पिता घुराउ यादव,
गीता यादव पति तेजराम, दिनेश सिदार पिता शुकराम सिदार
कान्ता सिदार पिता दिनेश सिदार,सुरजकुमार यादव पिता सौकिलाल, शुकराम सिदार पिता सेवक सिदार हैँ.
महिलाओं के ‘नशामुक्ति अभियान’ को माफिया की खुली चुनौती-
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि गांव को शराब मुक्त करने के लिए “सक्रिय महिला समूह” और ग्राम पंचायत के सहयोग से अथक प्रयास कर ‘नशामुक्ति अभियान’ चलाया गया था। इस अभियान के बाद कुछ समय के लिए शराब बिक्री पर रोक लगी थी, लेकिन माफियाओं ने फिर से “लुका-छुपी” कर महुआ शराब की बिक्री शुरू कर दी।
महिलाओं का कसूर सिर्फ इतना था कि वे गांव में शांति और सुरक्षा चाहती थीं। जब वे माफियाओं के पास जाकर हाथ जोड़कर शराब न बनाने की गुजारिश करने गईं, तो माफियाओं ने उनकी बात सुनने के बजाय एक व्यक्ति को सरेराह बुरी तरह पीट दिया।
सप्ताह में दूसरी बार थाना में फरियाद-
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शराब माफियाओं को आबकारी विभाग या स्थानीय पुलिस का कोई डर नहीं है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे महिलाओं को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उनका यह कहना कि “पुलिस उनकी जेब में है”!
सारंगढ़-बिलाइगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक गहरा धब्बा है।
ग्राम फर्सवानी की पीड़ित महिलाओं ने आज हिम्मत जुटाकर एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार सारंगढ़ थाना का दरवाजा खटखटाया। उनकी गुहार एक ही थी: “उनके गांव को इस जहर से बचा लो।”
कब तक माफियाराज?
यह एक बड़ा सवाल है कि जब महिलाओं ने खुलेआम शराब बनाने, माफियाओं के नाम उजागर कर दिए हैं और लिखित शिकायत में पंच तक का नाम शामिल है, तो आबकारी विभाग की आंखें कब खुलेंगी? क्या आबकारी विभाग को केवल सरकारी राजस्व वसूलने में दिलचस्पी है या उसे आम जनता की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है? यह संदेह अब गहराने लगा है कि कहीं इन माफियाओं को वर्दी धारियों का खुला या परोक्ष संरक्षण प्राप्त है।

क्या इन महिलाओं को न्याय मिलेगा?
महिलाओं ने पुलिस स्टेशन के बाहर असहाय खड़ी होकर एक सिस्टम पर भरोसा करने की कोशिश की है। शिकायत पत्र में नामजद सभी आरोपियों, जिसमें पंच रमेश सिदार शामिल हैं, को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
फर्सवानी में तुरंत विशेष अभियान चलाकर अवैध शराब के ठिकानों को जमींदोज किया जाए।
महिलाओं और उनके परिवारों को माफियाओं की धमकियों से तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।
इस मामले में लापरवाही बरतने वाले स्थानीय पुलिस और आबकारी अधिकारियों पर विभागीय जांच बैठाई जाए।
अगर इन महिलाओं को न्याय नहीं मिला, तो यह न केवल जिला प्रशासन की विफलता होगी, बल्कि यह माफियाओं को एक बड़ा संदेश देगा कि वे सारंगढ़-बिलाइगढ़ में कानून के असली मालिक हैं।


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