तुर्की तालाब फिर बनेगा ‘सौंदर्य का केंद्र’ या फिर खर्चों का खेल? 15 लाख के नए काम पर उठे सवाल!
सारंगढ़। नगर में स्थित तुर्की तालाब एक बार फिर सुर्खियों में है। सारंगढ़ नगर पालिका द्वारा तालाब के सौंदर्यीकरण और सफाई के लिए लगभग 15 लाख रुपये खर्च करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस बार तालाब को पूरी तरह खाली कर दिया गया है—पानी को पंप के जरिए नालियों में बहाकर सुखा दिया गया है, ताकि साफ-सफाई और मरम्मत का काम किया जा सके।
तालाब सूखा, सफाई और पिचिंग की तैयारी तेज
नगर पालिका द्वारा प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये तालाब की पिचिंग और साफ-सफाई पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 5 लाख रुपये गार्डन में लाइटिंग व्यवस्था के लिए निर्धारित हैं। तालाब के चारों ओर फैली गंदगी और प्रदूषण को देखते हुए यह कदम जरूरी बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस कार्य के लिए स्वीकृति डॉ. संजय कन्नौजे (कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़) के निर्देश पर मिली है, जिसके बाद नगर पालिका ने काम की तैयारी शुरू कर दी है।
शहर का इकलौता गार्डन, लेकिन बदहाल स्थिति
तुर्की तालाब के किनारे बना गार्डन शहर का प्रमुख और लगभग एकमात्र सार्वजनिक उद्यान है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग घूमने और समय बिताने पहुंचते हैं। बावजूद इसके, गार्डन की हालत बदहाल बनी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में यह जगह असामाजिक तत्वों का अड्डा बनती जा रही है।
5 साल में लाखों खर्च, लेकिन नतीजा शून्य?
पिछले पांच वर्षों में तुर्की तालाब और उसके गार्डन पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। करीब दो साल पहले टिमरलगा और गुड़ेली के क्रेशर संघ द्वारा CSR मद से लगभग 50 लाख रुपये खर्च कर गार्डन का जीर्णोद्धार किया गया था। इस दौरान पाथ-वे, आकर्षक लाइटिंग और “आई लव सारंगढ़” डिस्प्ले भी लगाया गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन सुविधाओं को असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ कर बर्बाद कर दिया गया। इसके अलावा ओपन जिम और बच्चों के झूले जैसी सुविधाएं भी लगाई गईं, जो अब खराब हालत में हैं।
“सोने के अंडे देने वाली मुर्गी” बन गया तालाब!
लगातार हो रहे खर्च और जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होने के कारण अब जानकार और स्थानीय लोग तुर्की तालाब गार्डन को “सोने के अंडे देने वाली मुर्गी” तक कहने लगे हैं। बिना चौकीदार और निगरानी के यह गार्डन पूरी तरह अनाथ नजर आता है।
जरूरत: निगरानी और जवाबदेही की
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल बजट खर्च करने से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि मजबूत मॉनिटरिंग, सुरक्षा व्यवस्था (चौकीदार) और नियमित देखरेख से ही इस गार्डन और तालाब की हालत बेहतर हो सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि 15 लाख रुपये का यह नया सौंदर्यीकरण वास्तव में शहर को एक साफ-सुथरा और सुंदर तालाब देता है या फिर यह भी पिछले खर्चों की तरह सवालों के घेरे में आ जाता है।
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