“टीबी पर करारा प्रहार” : सारंगढ़ में 100 दिवसीय महाअभियान शुरू, घर-घर पहुंचेगी जांच टीम…
सारंगढ़। जिले को क्षय (टीबी) मुक्त बनाने की दिशा में अब निर्णायक पहल शुरू हो चुकी है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एफ. आर. निराला के मार्गदर्शन में जिले में 100 दिवसीय विशेष टीबी उन्मूलन अभियान का आगाज़ किया गया है। यह अभियान विश्व क्षय रोग दिवस से प्रारंभ होकर अब तेजी से गांव-गांव तक पहुंच रहा है।
दूरस्थ क्षेत्रों में छिपे मरीजों की होगी पहचान
इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरस्थ और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में छिपे टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें चिन्हित ग्रामों में पहुंचकर संदिग्ध मरीजों की नि:शुल्क एक्स-रे जांच कर रही हैं।
घर-घर सर्वे, मितानिनों की अहम भूमिका
स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनें गांवों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रही हैं और टीबी के लक्षणों जैसे—
दो हफ्ते से ज्यादा खांसी
लगातार वजन कम होना
रात में पसीना आना
शरीर में गांठ
की पहचान कर संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मोबाइल यूनिट से गांव में ही जांच सुविधा
ग्रामीणों को जिला अस्पताल तक भटकने से बचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से गांव में ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे अधिक से अधिक लोगों की समय पर जांच संभव हो रही है।
कलेक्टर का सख्त निर्देश – कोई मरीज न छूटे
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस 100 दिवसीय अभियान के दौरान कोई भी संभावित टीबी मरीज छूटना नहीं चाहिए।
डॉ. निराला की अपील – “टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी”
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एफ. आर. निराला ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि— “टीबी एक पूरी तरह से साध्य बीमारी है। यदि किसी को लंबे समय से खांसी या कमजोरी है, तो बिना डर जांच कराएं। समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है।”
निक्षय पोषण योजना से मिलेगा आर्थिक सहयोग
टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण आहार के लिए शासन द्वारा निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके।
इन गांवों में लगेगा विशेष टीबी जांच शिविर
निक्षय निरामय 100 दिवस अभियान के तहत निर्धारित शिविर कार्यक्रम इस प्रकार है—
30 मार्च – पवनी
01 अप्रैल – गोविंदबन (बिलाईगढ़)
02 अप्रैल – धनसीर
03 अप्रैल – सेमराडीह
04 अप्रैल – सरिया
06 अप्रैल – कोकबहाल
07 अप्रैल – बरमकेला
08 अप्रैल – बाहालीडीह
09 अप्रैल – बोन्दा
10 अप्रैल – लुकापारा
11 अप्रैल – गोडिहारी
13 अप्रैल – रेडा
15 अप्रैल – गोड़म
16 अप्रैल – हिर्री
17 अप्रैल – झरपडीह
18 अप्रैल – कोतरी
20 अप्रैल – महकमपुर
अभियान से बदलेगी सोच, मिटेगा टीबी का डर
यह अभियान न सिर्फ मरीजों की पहचान और इलाज सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों और डर को भी खत्म करेगा।
संदेश साफ है — “समय पर जांच, टीबी पर विजय”
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