“धर्म के नाम पर सियासत!” — बिनोद भारद्वाज का भाजपा सरकार पर तीखा हमला…

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सारंगढ़। धर्म स्वतंत्र्य विधेयक को लेकर जिला पंचायत सदस्य बिनोद भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को “राजनीतिक तमाशा” करार देते हुए कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है, न कि वास्तविक समस्याओं का समाधान।
भारद्वाज ने बताया कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 12 राज्यों को धर्म स्वतंत्रता कानून के संबंध में नोटिस जारी किया गया है, जिससे इस कानून की संवैधानिक वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों पर एक बड़ा संकेत बताते हुए कहा कि यह कानून न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतर पाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन रमन सिंह सरकार भी इसी तरह का संदेश देने की “नौटंकी” कर चुकी है और वर्तमान कानून उसी का “कॉपी-पेस्ट” संस्करण है। उनके अनुसार, सरकार धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है, जबकि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि डर, दहशत, लालच या धोखे से किया गया धर्मांतरण पहले से ही कानूनन अपराध है, इसलिए नए कानून की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए केवल नियमों और सजा के प्रावधानों में बदलाव कर रही है।
संविधान विशेषज्ञों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) के तहत मिले अधिकारों पर यह कानून खरा नहीं उतरता।
अंत में भारद्वाज ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कानून समाज में भय और असमंजस का माहौल पैदा करेंगे, जो लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जनहित के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे, न कि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीति करे।

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