“अमृतकाल में भी उपेक्षा क्यों?”तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना, 9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी…
सारंगढ़। अपनी लंबित मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने नगर के कचहरी परिसर में जोरदार धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुईं और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए जल्द मांगें पूरी करने की अपील की।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश के “अमृतकाल” में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांव-गांव और शहर-शहर तक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्यक्रमों के साथ-साथ कोविड महामारी, सर्वे (SIR) और निर्वाचन कार्यों में भी उन्होंने अहम जिम्मेदारी निभाई। इसके बावजूद राज्य सरकार के बजट में उनकी मांगों की अनदेखी किए जाने से प्रदेशभर की कार्यकर्ताओं में आक्रोश है।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि देशभर में लगभग 28 लाख तथा छत्तीसगढ़ में करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों में स्वयं को हतोत्साहित महसूस कर रही हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर जल्द मांगें पूरी करने की मांग की।
मुख्य मांगें क्या हैं?
(1)शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए — जिस प्रकार शिक्षाकर्मियों और पंचायत कर्मियों को नियमित किया गया, उसी तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को भी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
(2) न्यूनतम वेतन लागू किया जाए — शासकीय कर्मचारी घोषित होने तक कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 26 हजार रुपये और सहायिकाओं को 22,100 रुपये मानदेय दिया जाए, साथ ही मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष 1000 रुपये की वृद्धि की जाए।
(3)सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था — सेवा निवृत्ति, आकस्मिक मृत्यु पर एकमुश्त ग्रेच्युटी, मासिक पेंशन तथा समूह बीमा का लाभ देने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच के प्रांतीय आह्वान पर 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय कार्यबहिष्कार करते हुए प्रदेश के सभी जिलों में धरना-रैली और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को उग्र रूप देते हुए 9 मार्च 2026 को लगभग एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं राजधानी रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी।
धरना प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वे वर्षों से न्यूनतम संसाधनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं, इसलिए अब सरकार को उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
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