संस्कृत शिक्षक संघ ने संस्कृत को अनिवार्य कराने मुख्यमंत्री के नाम विधायक को सौंपा ज्ञापन…

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पलारी। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश संचालक डॉ कोमल वैष्णव के नेतृत्व में प्रदेश में संस्कृत शिक्षा अनिवार्य कराने हेतु कसडोल विधायक को ज्ञापन सौंपा। डॉ वैष्णव ने बताया कि प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा के चलते संस्कृत को विकल्प पर रखने से संस्कृत शिक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। सभ्यता, संस्कृति और संस्कार संस्कृत के अध्ययन अध्यापन से ही संभव है बिना संस्कार के शिक्षा मात्र कोरी कल्पना है संस्कृत देववाणी और संस्कार परक भाषा है ज्ञान उपदेश धर्म दर्शन सभी शास्त्रों में भरे पड़े हैं। अतः संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन परम आवश्यक है। वर्तमान में संस्कृत हिन्दी और अंग्रेजी के स्थान पर व्यावसायिक पाठ्यक्रम लेने के आदेश से हड़कंप मचा हुआ है भाषा का अध्ययन अध्यापन जरूरी है उच्च अधिकारियों के मौखिक आदेश के चलते संस्कृत भाषा ज्यादा प्रभावित हो रही है क्योंकि संस्कृत के स्थान पर व्यावसायिक पाठ्यक्रम पढ़ाई जा रही है जिससे संस्कृत शिक्षा पर विशेष असर पड़ने लगा है अधिक अंक और ज्यादा छात्र वृत्ति के चलते बच्चे संस्कार परक भाषा को छोड़ने मजबूर हैं।इसी तरह के मामले में हरियाणा सरकार का निर्णय व्यावसायिक पाठ्यक्रम को सातवें विषय के रूप में रखना बहुत ही सराहनीय है। अतः संस्कृत शिक्षक संघ के माध्यम से प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को अनिवार्य कराने हरियाणा राज्य की तरह व्यावसायिक पाठ्यक्रम को सातवें विषय में रखने हेतु मुख्यमंत्री के नाम विधायकों को ज्ञापन दिया जा रहा है। कसडोल विधायक आदरणीय संदीप साहू ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि संस्कृत देववाणी अति प्राचीन संस्कार परक भाषा है भाषा का संरक्षण और संवर्धन बहुत जरूरी है उक्त मामले को विधानसभा में प्रमुखता से रखने का ठोस आश्वासन दिया।उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से प्रदेश संचालक डॉ कोमल वैष्णव तारूण साहू महेंद्र वैष्णव गंगाराम पैकरा देवेश वर्मा मनहरण मानिकपुरी रामप्रसाद साहू विजय कुर्रे देवेंद्र लहरे मनोज वर्मा सहित अनेक संस्कृत शिक्षक उपस्थित थे।

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