त्योहार से ठीक पहले देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) को लेकर ताजा अपडेट जारी किया है।

सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस योजना के जरिए अब तक देश भर के किसानों के खातों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की जा चुकी है।
संसद में दी गई बड़ी जानकारी
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने बताया कि अब तक इस योजना की 21 किस्तें सफलतापूर्वक जारी की जा चुकी हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। उन्होंने साफ किया कि करोड़ों किसान इस सीधे कैश ट्रांसफर का लाभ उठा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
2019 से बदल रही है किसानों की किस्मत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में इस योजना की नींव रखी थी। इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाना और उन्हें बीज, खाद व अन्य कृषि जरूरतों के लिए समय पर पैसा उपलब्ध कराना था। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं में से एक बन चुकी है।
सालाना 6,000 रुपये का गणित
योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि साल में तीन बार, 2,000-2,000 रुपये की समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। हर चार महीने पर मिलने वाली यह मदद किसानों को बुवाई और कटाई के समय होने वाले खर्चों में बड़ी राहत देती है।
बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे खाते में पैसा
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसकी पारदर्शिता है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पैसा सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में पहुँचता है। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है। सरकार ने अब ई-केवाईसी (e-KYC) और आधार सीडिंग को अनिवार्य कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद किसानों को ही मिले।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के हाथ में सीधे नकदी पहुँचने से ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ती है। सरकार ने योजना की निगरानी के लिए एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार किया है। अधिकारियों द्वारा नियमित जांच की जाती है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी यह योजना जारी रहेगी और समय-समय पर पात्रता की जांच कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाता रहेगा।
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