अब चंदनपुर होगा छत्तीसगढ़ के इस गांव का नाम, ग्रामीणों को पहले आती थी शर्म, आप पकड़ लेंगे सिर!
कहते हैं नाम केवल पहचान नहीं होता, वह आत्मसम्मान और सामाजिक गरिमा से भी जुड़ा होता है। कवर्धा जिले के एक छोटे से गांव के लिए यह बात अब हकीकत बन चुकी है।
वर्षों से दूसरे नाम से पहचाना जाने वाला गांव अब आधिकारिक रूप से चंदनपुर कहलाएगा। राज्य शासन द्वारा राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होते ही गांव में ऐसा उत्सव उमड़ा, मानो बरसों बाद खुशियों ने दस्तक दी हो। गलियों में मिठाइयां बंटने लगीं, ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी और हर चेहरे पर राहत साफ झलकने लगी।
पुराने नाम से जुड़ी सामाजिक असहजता: युवाओं को झेलने पड़ते थे ताने
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने नाम के कारण उन्हें लंबे समय तक सामाजिक असहजता झेलनी पड़ी। पढ़ाई, नौकरी या किसी काम से बाहर जाते समय जैसे ही गांव का नाम बताते तो कई बार ताने सुनने पड़ते और मजाक उड़ाया जाता। इससे खासकर युवाओं का मन आहत होता था। कई लोग तो बाहरी जगहों पर गांव का नाम बताने से भी कतराने लगे थे। अब चंदनपुर नाम मिलने से वर्षों से दबा आत्मसम्मान फिर से जीवित हो उठा है। चंदनपुर नाम से लौटा आत्मविश्वास ग्रामीणों के मुताबिक चंदन शब्द अपने आप में पवित्रता, सुगंध और सम्मान का प्रतीक है।
पवित्रता और सम्मान की नई पहचान: ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को मिला न्याय
अब गांव की नई पहचान बच्चों और युवाओं को भी गर्व से सिर उठाकर आगे बढ़ने का हौसला दे रही है। लोग कह रहे हैं कि अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ बता सकेंगे कि वे चंदनपुर से हैं। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे ग्रामीणों की लगातार कोशिशें और सामूहिक आवाज रही। वर्षों से लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी पीड़ा रखते आ रहे थे। आखिरकार शासन स्तर पर प्रक्रिया पूरी हुई और गांव को नई पहचान मिल सकी। ग्रामीण इसे अपनी सामूहिक जीत मान रहे हैं।
विधायक विजय शर्मा के प्रति जताया आभार: आत्मसम्मान लौटाने वाला फैसला
इस फैसले के लिए गांववासियों ने क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक ने उनकी भावनाओं को समझते हुए शासन स्तर पर पहल की और नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया। उनके मुताबिक यह सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि हजारों लोगों के आत्मसम्मान को लौटाने वाला निर्णय है। हर आंगन में उत्सव, हर दिल में सुकून है। चंदनपुर बना यह गांव अब केवल नाम बदलने की कहानी नहीं है।
सामाजिक सोच में बदलाव का प्रतीक: हर आंगन में खुशियों की दस्तक
यह उस सामाजिक सोच का प्रतीक है, जहां अपमानजनक पहचान से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला बताता है कि समाज अब संवेदनशील हो रहा है और हर व्यक्ति की गरिमा को महत्व दिया जा रहा है। आज चंदनपुर के हर आंगन में खुशी का माहौल है। महिलाएं एक-दूसरे को मिठाई खिला रही हैं, युवा नए सपनों की बातें कर रहे हैं और बुजुर्ग पुराने दिनों की पीड़ा को पीछे छोड़ नई शुरुआत का आशीर्वाद दे रहे हैं।
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