फाइलेरिया मुक्त होगा सारंगढ़: कलेक्टर ने पत्रकारों से कहा— ‘दवा खाएं, हाथीपाँव भगाएं’..कलेक्ट्रेट में ‘हाथीपाँव’ उन्मूलन पर कार्यशाला..2 वर्ष से ऊपर के सभी नागरिकों को खिलाई जाएगी मुफ्त दवा..
सारंगढ़। जिले को फाइलेरिया (हाथीपाँव) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। शनिवार को कलेक्टर सभागार में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में कलेक्टर डॉ. संजय कनौजे और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एफ.आर. निराला ने जिले के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों से सीधा संवाद किया। इस दौरान ‘सामूहिक दवा वितरण’ (MDA) कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की गई।
फाइलेरिया: एक अदृश्य दुश्मन का खतरा-
कलेक्टर डॉ. कनौजे ने बताया कि फाइलेरिया कोई वंशानुगत बीमारी नहीं है, बल्कि यह संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके कीटाणु शरीर में 5 से 15 साल तक बिना किसी लक्षण के छिपे रह सकते हैं। जब तक पैर या अंडकोष में सूजन (Hydrocele) दिखाई देती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
MDA अभियान: घर-घर पहुँचेगी सुरक्षा की गोली-
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर DEC और एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाएंगी।
किसे खानी है: 2 वर्ष से अधिक उम्र के सभी स्वस्थ व्यक्तियों को।
किसे नहीं खानी है-
2 साल से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।
अनिवार्य शर्त-
दवा कभी भी खाली पेट न लें और स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने ही खाएं।
साइड इफेक्ट नहीं, यह है दवा के असर का संकेत-
डॉ. निराला ने पत्रकारों के शंका समाधान करते हुए कहा कि दवा खाने के बाद यदि चक्कर या उल्टी महसूस हो, तो घबराएं नहीं। इसका अर्थ है कि दवा शरीर में मौजूद फाइलेरिया के कीटाणुओं को मार रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है जो थोड़े समय में स्वतः ठीक हो जाता है।
प्रशासनिक अमला और पत्रकारों की सहभागिता-
प्रेस वार्ता में डिप्टी कलेक्टर शिक्षा शर्मा, तहसीलदार प्रकाश पटेल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह ठाकुर, भरत अग्रवाल की मीडिया हाउस टीम, राम किशोर दुबे, ओमकार केसरवानी, गोविंद बरेठा, राजेश यादव, योगेश कुर्रे और टंडन सहित करीब 30 पत्रकारों ने हिस्सा लिया। सभी ने जन-जागरूकता फैलाने में प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिया।
कलेक्टर की अपील-
“फाइलेरिया का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव ही समाधान है। सुरक्षित रहने के लिए साल में एक बार दवा का सेवन अनिवार्य रूप से करें।”
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