सेवानिवृत्त शिक्षकों को जीरो पेंशन से जीवन निर्वाह का संकट– डॉ कोमल

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पलारी। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और उपाध्यक्ष डॉ कोमल वैष्णव ने बताया कि एल बी संवर्ग के शिक्षकों का जीरो पेंशन में सेवानिवृत्त होना बेहद चिंताजनक और दुखद स्थिति है उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पूर्ण पेंशन शिक्षकों का सबसे बड़ा मुख्य और ज्वलंत मुद्दा बन चुका है जिसे नजर अंदाज करना सेवानिवृत्त शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के बलौदा बाजार जिला अध्यक्ष देवेश वर्मा कार्यकारी जिलाध्यक्ष तोमर डोंडे महासचिव तेज कुमार वैष्णव जिला संयोजक खेलावन घृतलहरे दीपक सारंग जिला सचिव चूड़ामणि साहू महेंद्र वैष्णव जिला महामंत्री नागेश्वर पटेल जिला संगठन मंत्री जनी राम साहू ने संयुक्त रूप से बताया कि 1998 से नियुक्त शिक्षक आज भी पुरानी पेंशन से वंचित है 1998 और 2005 में नियुक्त शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं । उन्होंने बताया कि संविलियन पश्चात् 10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले शिक्षक ही न्यूनतम पेंशन के दायरे में आते हैं जिसके चलते 2018 में संविलियन हुए हजारों शिक्षक 2028तक जीरो पेंशन में सेवानिवृत्त हो जाएंगे यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है।आज ऐसे शिक्षक देखने को मिल रहे हैं जिन्होंने 60000,70000और 90000तक अंतिम वेतन प्राप्त किया लेकिन इसके बावजूद वे शून्य पेंशन में सेवानिवृत्त हुए इससे न केवल शिक्षकों की स्थिति बदतर हो रही है , बल्कि समाज में उनके सम्मान जीवन स्तर और पारिवारिक स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सेवानिवृत्त शिक्षक स्वास्थ्य सुविधाएं तक जुटा नहीं पा रहे हैं और आजीविका के लिए छोटे मोटे कार्य करने को मजबूर हैं। एसोशिएशन ने बताया कि यह पीड़ा केवल आज के सेवानिवृत्त शिक्षक तक सीमित नहीं है बल्कि भविष्य में 33वर्ष की सेवा पूर्ण न करने वाले अधिकांश शिक्षक अल्प पेंशन या न्यूनतम पेंशन के दायरे में आ जाएंगे जिससे महंगाई के इस दौर में भरण पोषण असंभव होता जाएगा।इसी संदर्भ में एसोसिएशन ने माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के उस निर्णय का उल्लेख किया , जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि संविलियन से पूर्व दी गई दीर्घकालीन सेवा को अप्रासंगिक मानकर नजर अंदाज नहीं किया जा सकता ।इसी आधार पर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि संविलियन के पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए उसे पेंशन योग्य सेवा माना जाय और शीघ्र आदेश जारी किए जाएं।

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