सारंगढ़। इलाके के गुड़ेली में व्यापारिक रंजिश और वर्चस्व की जंग अब मारपीट तक उतर आई है। जायसवाल ढाबा के मैनेजर के साथ जिस तरह की बर्बरता की गई, उसने इलाके के कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिर्फ एक रसोइए (मिस्त्री) को काम पर रखने जैसी मामूली बात को लेकर कुछ लोगों ने गुंडागर्दी का नंगा नाच दिखाया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, गुड़ेली स्थित हरिराम जायसवाल के ढाबे में मनोज जायसवाल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। विवाद की जड़ बना एक कारीगर, सीताराम राठिया, जो पहले आरोपी रामकुमार जायसवाल के ढाबे में काम करता था। जब सीताराम ने वहां काम छोड़कर हरिराम के ढाबे में जॉइन किया, तो यह बात आरोपियों को बर्दाश्त नहीं हुई।
लात-घूसों और डंडों से हमला-
बीती 31 जनवरी की सुबह करीब 9:30 बजे, आरोपी रामकुमार जायसवाल, मनीष जायसवाल, हुलास राम जायसवाल और उनके साथियों ने फिल्मी अंदाज में ढाबे पर धावा बोल दिया। पहले तो उन्होंने मैनेजर मनोज के साथ भद्दी गालियां देते हुए बदसलूकी की और फिर देखते ही देखते मारपीट शुरू कर दी।
चोट के निशान:
आरोपियों ने मनोज को हाथ, मुक्कों, लातों और डंडों से इतनी बुरी तरह पीटा कि उनके सिर, कान के पास और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। हमलावरों ने जान से मारने की धमकी देते हुए कारीगर को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश भी की।
बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज-
मैनेजर मनोज की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस सारंगढ़ ने आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है:
धारा 296: अश्लील कृत्य और गालियां देना।
धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुंचाना।
धारा 351(2): आपराधिक धमकी।
धारा 3(5): सामान्य इरादे से किया गया कृत्य।
सवाल यह उठता है: क्या अब किसी को काम पर रखना भी जानलेवा साबित होगा? व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में इस तरह की हिंसा समाज में क्या संदेश दे रही है?
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