सारंगढ़। संत शिरोमणि गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर भाजपा नेता अरविंद खटकर ने उनके विचारों और संदेशों को याद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास जी का दर्शन सामाजिक समरसता, समानता और मानव गरिमा पर आधारित है, जो सशक्त और समावेशी भारत की मजबूत नींव है।

मनखे-मनखे एक समान का संदेश-
अरविंद खटकर ने कहा कि गुरु घासीदास जी का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश समाज में सामाजिक न्याय और समान अधिकार की भावना को मजबूत करता है। यह विचार आज भी समाज को भेदभाव से मुक्त कर समरसता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सात उपदेश आज भी प्रासंगिक-
खटकर ने गुरु घासीदास जी के सात प्रमुख उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि—
सत्य बोलना
चोरी न करना
हिंसा से दूर रहना
परस्त्री गमन न करना
मांस और मदिरा का त्याग
स्वच्छता
परिश्रम
ये उपदेश आज भी समाज को सही दिशा देने वाले हैं और नैतिक जीवन की आधारशिला हैं।
छुआछूत और भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष-
उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी ने अपने जीवन में छुआछूत, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संघर्ष कर मानव गरिमा और सामाजिक समानता की स्थापना की। उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक सुधार और चेतना का प्रतीक रहा है।
समान अधिकार से ही सच्चा विकास-
अरविंद खटकर ने कहा कि गुरु घासीदास जी का जीवन यह स्पष्ट संदेश देता है कि सच्चा विकास तभी संभव है, जब समाज के हर वर्ग को समान अधिकार, समान अवसर और सम्मान मिले।
समान विकास और सम्मानजनक जीवन का मार्ग-
उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी का दर्शन सामाजिक चेतना के साथ-साथ समान विकास और सम्मानजनक जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। यही विचार आज के भारत को मजबूत, समावेशी और सशक्त बनाने की आधारशिला है।
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