रायगढ़। जिला मुख्यालय में दसवीं के छात्र द्वारा स्कूल में जय श्रीराम बोलने पर प्रचार्य द्वारा क्लास में तीन घंटे तक खड़ा करा दिए जाने का मामला तुल पकड़ लिया है। ऐसे में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने नटवर स्कूल के गेट में ताला जड़ते हुए जमकर नारेबाजी किया। साथ ही तहसीलदार व बीईओ के समझाईश पर मामला शांत हुआ।
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय स्थित शासकीय नटवर आत्मानंद स्कूल में शुक्रवार को सुबह उस वक्त हंगामा हो गया जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिर्षद के दर्जन से अधिक छात्र नेताओं ने स्कूली छात्रों के साथ मिलकर स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। साथ ही साथ उन्होंने प्रीसिंपल के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए पद से हटाने की मांग की है। एव्हीबीपी नेताओं के अनुसार कक्षा दसवी में पढऩे वाला एक छात्र अभिवादन में विगत कई दिनों से जय श्रीराम बोलता था, साथ ही गुरुवार को भी क्लास में जय श्रीराम बोला तो उसमें पढ़ा रहे शिक्षक ने उसे मना करते हुए कहा कि यह स्कूल है यहां जय राम नहीं बोल सकते, साथ ही उक्त शिक्षक ने इसकी शिकायत स्कूल के प्रींसिपल से कर दिया। जिससे प्रींसिपल ने उक्त छात्र को क्लास में ही सभी बच्चों के सामने ब्रेंच पर करीब तीन घंटा तक खड़ा करने की फरमान सुनाते हुए उसे सजा दी गई। साथ ही यह बोला गया कि दोबारा इस तरह की गलती नहीं करना। ऐसे में इसकी जानकारी मिलते ही शुक्रवार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने स्कूल गेट में ताला जड़ते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। साथ ही उक्त प्रींसिपल पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए। ऐसे में घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तब उन्होंने दोषी प्राचार्य के खिलाफ जांच करते हुए नियमानुसार कार्रवाई का मांग किया है।
चार पीरियड तक कराया खड़ा
इस संबंध में छात्र नेताओं ने बताया कि स्कूल की महिला प्रींसिपल ने छात्र को चार पीडियड तक क्लास में खड़ा कराई थी। हालांकि भगवान राम हमारे सनातन धर्म के आदर्श है, जिससे हर हिंदू जय श्रीराम बोलाता है। ऐसे में यह हिंदु धर्म के साथ अन्याय हुआ है और शिक्षा के मंदिर में राम का नाम लेना कोई गुनाह नही है। यह कोई पहली घटना नही है इस स्कूल में ऐसी घटना तीन बार हो चुकी है। छात्र नेता चाहते हैं कि प्रींसिपल इस्तीफा दें या फिर उनका कहीं और तबादला हो।

मौके पर पहुंचे तहसीलदार
स्कूली बच्चों और छात्र नेताओं द्वारा आंदोलन करने की जानकारी मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस टीम के साथ तहसीलदार शिवकुमार डनसेना भी पहुंचे हुए थे। जो मामले से अवगत होते हुए छात्र नेताओं को समझाईश देेते हुए जांच का आश्वासन दिया, तब जाकर मामला शांत हुआ।
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