सारंगढ़: गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान, तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान। उपरोक्त उद्धरण व्यक्ति के जीवन में ‘गुरु’ के गुणों और महत्व को दर्शाता है। भारत की परंपरा के अनुसार, फर्सवानी विद्यालय में भी ‘गुरु पूर्णिमा’ का उत्सव बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। स्कूल के सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों, ने इस उत्सव में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानाचार्य श्री एस. सिंह चौहान ने इस बात पर प्रकाश डाला कि गुरु एक मार्गदर्शक होता है जो जीवन की यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करता है। गुरु हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं, जिससे हमें सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। शिक्षा में गुरु महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हमें जटिल विषयों को समझने में मदद करते हैं। भविष्य की चुनौतियों के लिए हमारे दिमाग को तैयार करते हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि गुरु पाठ्यपुस्तकों और पारंपरिक शिक्षा से परे ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं। वे हमें विषयों की गहरी समझ प्रदान करते हैं, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और हमें सवाल करने और खोज करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यह बौद्धिक उत्तेजना हमारे विकास के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक सूचित और प्रबुद्ध व्यक्ति हैं।


उक्त अवसर पर प्राचार्य एस.एस चौहान,वरिष्ठ व्याख्याता एच के बंजारे, आर के प्रधान,जी एल पटेल, ममता आदित्य, एल पटेल, एस बी नायक, सिदार सर, राठिया सर,एवम् समस्त स्टॉफ के साथ विद्यालय के छात्र/छात्रा उपस्थित रहे।

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