1 मार्कशीट पर 2 भाई कर रहे थे सरकारी नौकरी, 43 साल बाद खुली पोल, मचा हड़कंप…
नगर निगम में बीते 43 सालों से सहायक वर्ग-3 की नौकरी करने वाले कर्मचारी ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी हासिल की थी. एक शिकायत की जांच में यह तथ्य सामने आया है और अब नगर निगम की ओर से यूनिवर्सिटी पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है.
इसमें कहा गया है कि नगर निगम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 कैलाश कुशवाह का भाई रणेंद्र सिंह कुशवाह राज्य पावर लूम बुनकर संघ में कर्मचारी है. जांच के बाद अगस्त 2023 में ही कैलाश कुशवाह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था.
जांच में पता चला था कि रणेंद्र सिंह कुशवाह और कैलाश कुशवाह ने नौकरी हासिल करने के लिए जो अंकसूचियां लगाई है, वह एक ही हैं. कैलाश ने भाई की ही अंकसूची में हेरफेर कर नौकरी हासिल की है. शिकायत पर जब नगर निगम ने अंकसूची का वेरीफिकेशन माध्यमिक शिक्षा मंडल से करवाया गया. तो जांच में अंकसूची फर्जी पाई गई. इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक क्राइम ऋषिकेश मीणा ने बताया कि नगर निगम की ओर से एफआइआर दर्ज करवाई गई है.
अपने ही भाई की मार्कशीट लगाकर हासिल की थी नौकरी
मुरैनी निवासी कैलाश कुशवाहा ने अपने भाई रणेंद्र की मार्कशीट का इस्तेमाल किया था और वह 1981 से नगर निगम ग्वालिय में नौकरी कर रहा था. इस मामले की शिकायत अशोक कुशवाह ने नगर निगम से की थी और इसके बाद नगर निगम ने डिपार्टमेंटल जांच शुरू की थी.
नगर निगम के शिकायती आवेदन पर हुई एफआईआर
यूनिवर्सिटी पुलिस थाना में नगर निगम के उपायुक्त की ओर से शिकायत की गई है. अंकसूची की जांच में पाया गया कि अंकसूची कैलाश कुशवाह के नाम पर है ही नहीं, बल्कि जिस अंकसूची को उसने नौकरी ज्वाइन करते समय लगाया वह रणेंद्र सिंह के नाम पर ही है. रिकाॅर्ड आते ही इसमें नगर निगम की ओर से जांच रिपोर्ट के साथ शिकायती आवेदन दिया गया. डिप्टी कमिश्नर अनिल दुबे की शिकायत पर आरोपी कैलाश कुशवाह के खिलाफ पुलिस ने कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है.
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