रायगढ़: मिर्ची की खेती से महिला समूहों ने कमाएं 12.28 लाख रुपये…

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जगन्नाथ बैरागीरायगढ़, गांव की महिलायें बिहान सहयोग समूह से जुड़कर जागरूक होने के साथ-साथ परिवार को संबल बनाने में भागीदारी निभा रही है। जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढऩे लगा है। लैलूंगा महिला संघ ने अपने संगठन से जुड़े परिवारों को विभिन्न आजीविका गतिविधि में जोडऩे की योजना बनाई, जिसमें सब्जी उत्पादन, पशु पालन, मशरूम उत्पादन एवं अन्य गतिविधि को भी शामिल करने का फैसला किया। महिला संगठन ने अपनी सोच को मंजिल तक पहुंचाने के लिए कृषि उत्पादन संघ निर्माण करने का निर्णय लिया एवं इस संगठन के माध्यम से किसानों को गुणवत्ता बीज, उन्नत विधि में खेती करने की पद्धति के बारे में प्रशिक्षण, संग्रहण केन्द्र, बाजार सेवा उपलब्ध करने की योजना बनाई गई।प्रदान संस्था के सहयोग से महिला संगठन में जुड़े कृषि सखी को इस वर्ष की खरीफ की तैयारी के लिए फरवरी माह मे कृषि प्रशिक्षण दिया गया। पिछले 2 महीनों में चयनित कृषि उद्यमी और कृषि सखी की मदद से 19 गांवों के 386 परिवारों ने मिर्च नर्सरी सफलता पूर्वक तैयार की गई।
कृषि सखी के सहयोग से सीएलएफ कार्यालय में मिर्ची लगाने वाले परिवारों की संयुक्त बैठक हुई। मिर्च उत्पादन की बिक्री पर चर्चा और अंतिम रूप देने के बाद कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत पास के बाजारों में और 70 प्रतिशत मात्रा संयुक्त रूप से बाजार में बेचने का निर्णय लिया गया। मिर्च की फसल को रायगढ़, झारसुगुड़ा और राउरकेला मंडी में अब तक दो संग्रहण केन्द्रों से 12.6 मीट्रिक टन और 32.9 मीट्रिक टन उपज 18 रुपये, 28 रूपए एवं 35 रूपए की दर से मंडियों में बेचा गया है। अभी तक महिलाओं को कृषक उत्पादक संगठन के माध्यम से मिर्ची फसल से कुल 12 लाख 28 हजार रुपये प्राप्त हुआ है। कोरोना लॉक डाउन की स्थिति में सभी 306 महिला किसानों ने 2 लाख 30 हजार रुपये कृषि सखी के माध्यम से जमा किया। मई के महीने में लॉकडाउन के दौरान इस राशि से सीएलएफ ने संबंधित परिवारों को बीज, कीटनाशक और उर्वरक खरीद कर डोर-टू-डोर डिलीवरी सुनिश्चित की।

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