छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के सबसे चर्चित प्रत्याशी रहे ईश्वर साहू चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं। विधायक बनते ही उनके जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आ चुका है।
कभी रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले ईश्वर साहू सुरक्षाकर्मियों से घिरे नज़र आ रहे हैं। इतना ही नहीं,अब उनके चाहने वाले उन्हें मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

मिली X श्रेणी की सुरक्षा

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के 54 विधायकों में सबसे चर्चित साजा विधायक ईश्वर साहू को सुरक्षाकर्मियों ने घेर लिया है। उन्हें एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। इस सुरक्षा के पीछे ईश्वर साहू और उनके परिवार पर थ्रेट को वजह बताया जा रहा है। ईश्वर साहू का परिवार साजा के बिरनपुर में हिंसा का शिकार है। बताया जा रहा है कि उनके हर दिन दहशत और धमकियों में गुजार रहे हैं।
मंत्री बनने के लिए तैयार हैं ईश्वर साहू
बिरनपुर हिंसा में अपने जवान बेटे को खोने वाले ईश्वर साहू के घर मातम खत्म नहीं हुआ था कि अब उनके विधायक बनने की खुशियां मनाई जा रही हैं। उनके गांव और साहू समाज के लोगों ने ईश्वर साहू को विष्णुदेव साय सरकार में मंत्री बनाने की मांग की है। एक यूट्यूबर को दिए साक्षात्कार में मंत्री बनने के सवाल पर दिए गए जवाब ने ईश्वर साहू ने बड़ा ही रोचक जवाब दिया है। ईश्वर साहू का कहना है कि मुझे पता नहीं था कि मै राजनीति में आऊंगा और चुनाव जीतूंगा। अब राजनीति के मैदान में आ चुका हूं, तो अगर भगवान और भाजपा संगठन चाहेगा,तो मंत्री पद भी मुझे स्वीकार होगा।
बड़ी मुश्किल से अपने परिवार के लिए जुटाया 2 वक़्त का खाना
गैर- राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले ने ईश्वर साहू 7 बार के विधायक और भूपेश बघेल सरकार के दिग्गज मंत्री रविन्द्र चौबे को 5 हजार 196 वोटों के अंतर से हारकर साजा विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। रविन्द्र चौबे ने छत्तीसगढ़ सरकार में कृषि, पंचायत और संसदीय मंत्री रहते हुए चुनाव लड़ा था, वहीं पांचवी तक की पढ़ाई करने वाले 42 वर्षीय ईश्वर साहू खेतिहर मजदूर है। चुनाव लड़ने से पूर्व तक वह अपने जीवनयापन के लिए नागपुर में सब्जी बेचने और रिक्शा चलाने का काम कर रहे थे।
कैसे बने ईश्वर साहू विधायक
ज्ञात हो कि साजा विधानसभा के बीरनपुर नामक गांव में 8 अप्रैल 2023 को हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगो के बीच मामूली विवाद ने सांप्रदायिक रूप ले लिया था। इस विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया,जिसमे ईश्वर साहू के 22 साल के बड़े बेटे भुवनेश्वर साहू की हत्या हो गई थी। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और कांग्रेस सरकार के मंत्री रविंद्र चौबे के खिलाफ ईश्वर साहू को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया था। इस घटना की चर्चा पूरे देश में हुई और ईश्वर साहू चुनाव जीत गए। बहराहल ईश्वर प्रदेश के सबसे गरीब विधायकों में से हैं।
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