रायगढ़: नवनिर्वाचित विधायक ओमप्रकाश यानी ओपी चौधरी के रिकॉर्ड मतों से सियासी मैदान मारने से उनकी मां कौशल्या देवी चौधरी सिर से पांव तक गदगद हैं। वे कहती हैं कि कलेक्टर की नौकरी छोड़ने वाले बेटे का अरमान अब पूरा हुआ और पूरी शिद्दत से जनसेवा कर बच्चों का भविष्य गढ़ते हुए उन्हें रोजगार भी दिलाएंगे। मिडिया से बातचीत में कौशल्या देवी ने बताया कि ओमप्रकाश बचपन से ही मेहनती, समझदार, होशियार और जुनूनी है। पिता की असमय मृत्यु के समय ओपी चौधरी 8 बरस के थे। कौशल्या देवी जब ओमप्रकाश के साथ लेकर पेंशन लेने के लिए रायगढ़ स्थित कलेक्ट्रेट आईं।
इस दौरान कलेक्टर के दफ्तर को बाहर से देख ओपी ने पूछा कि वे कौन हैं, जिन्हें सभी लोग बड़ा सम्मान देते हैं। कौशल्या देवी ने कहा कि वे कलेक्टर हैं, तबसे ओपी के मन में कलेक्टर बनने की इच्छा हुई। कौशल्या देवी बताती हैं कि पति के जाने के बाद उन्होंने अपने दोनों बेटे पदम लोचन और ओमप्रकाश को पालने के लिए कितना संघर्ष किया। यही वजह है कि बड़े बेटे पद्मलोचन चौधरी आज शिक्षक हैं तो छोटे बेटे ओमप्रकाश कलेक्टर का सफर तय कर अब जनप्रतिनिधि चुने गए। बेटे का सियासी कद बढऩे से बेहद खुश कौशल्या देवी ने यह भी बताया कि 8 बरस के ओमप्रकाश को जब वे गांव के नजदीक रथमेला घुमाने लेकर गई थीं तो ओपी ने वहां कोई खिलौना नहीं खरीदा, बल्कि अपने आदर्श महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, चंद्रशेखर आजाद और अटल बिहारी बाजपेयी सरीखे शख्स की तस्वीरें ली। रुंधे गले और सजल नयनों से कौशल्या देवी आगे कहती हैं कि कुछ अलग करने की चाह रखने वाले ओपी चौधरी अब विधायक के तौर पर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी बेहतर सोच से खासकर युवा वर्ग के लिए जरूर नई योजना लाएंगे। साथ ही क्षेत्र में विकास की गंगा बहाते हुए नि:स्वार्थ जनसेवा के लिए हमेशा सजग रहेंगे। एक मां का दिल यह भी कहता है कि उनका बेटा सचमुच ऐसा बड़ा आदमी बने कि लोग उन्हें उत्कृष्ट विधायक का तमगा दें।

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