चुनावी चर्चा में नेताओं की अश्लील सीडी…
छत्तीसगढ़ में पिछले चुनाव से लगभग साल भर पहले का सीडी कांड लोगों को अब तक याद है। भाजपा के एक मंत्री की कथित अश्लील सीडी को लेकर महीनों तक हंगामा मचा रहा। इस मामले में तब के कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और अब के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आरोपी थे और अभी भी यह मामला अदालत में लंबित है।
अब जबकि चुनाव सिर पर है, तब राजनीतिक गलियारे में फिर से सीडी की चर्चा शुरू हो गई है। पुरानी सीडी की कहानी के साथ-साथ नई सीडी की अफ़वाहें तेज़ हैं। तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन अधिकृत तौर पर कोई भी कुछ नहीं बोलना चाहता। सीडी का बम फूटेगा या फुस्स होगा, इसका तो केवल अनुमान लगाया जा सकता है।
लेकिन छत्तीसगढ़ में पिछले साल भर से प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी एक के बाद एक धमाके कर रही है। कथित कोयला घोटाला हो या शराब घोटाला, ऑनलाइन सट्टा हो या मिलर्स घोटाला, कांग्रेस के कई पदाधिकारी, नेता, विधायक, अफ़सर ईडी की जांच के दायरे में हैं।
कुछ जेल में हैं, कुछ जमानत पर हैं तो कुछ से पूछताछ चल रही है। कुछ को लेकर दावा किया जा रहा है कि उनकी टिकट ही ईडी के चक्कर में कटी। कुछ को लेकर आशंका जताई जा रही है कि चुनाव ख़त्म होते न होते, कहीं वो भी चपेट में न आ जाएं। इनमें कई बड़े चेहरे भी हो सकते हैं।
इस बीच मुंगेली पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फिर ईडी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज सड़कों पर जितने कुत्ते-बिल्ली नहीं घूमते, उससे कहीं ज्यादा ईडी और आईटी वाले घूम रहे हैं। भाजपाईयों के पास मुद्दा नहीं है। इसलिए वो हमें ईडी-आईटी के नाम पर डरा रहे हैं।
जवाब असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की ओर से आया, जो मुंगेली से 50 किलोमीटर दूर, बिलासपुर में सभा कर रहे थे। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश को विश्व गुरु बनाने के लिए शक्तिशाली ईडी और सीबीआई की जरूरत है, नहीं तो गोठान घोटाला, कोयला घोटाला, शराब घोटाले का पैसा बाहर कैसे आएगा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो महीनों पहले घोषणा कर चुके हैं कि केंद्रीय एजेंसियां, चुनाव तक छत्तीसगढ़ में बनी रहेंगी। केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई हो या न हो, यह तो तय है कि नेताओं के भाषण में केंद्रीय एजेंसियां चुनाव तक बनी रहेंगी।
इधर जैसे-जैसे चुनाव की तारीख़ पास आती जा रही है, राजनीतिक दलों के लिए, अपनो से निपटना मुश्किल होता जा रहा है। धमतरी में कांग्रेस के पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा ने नामांकन फॉर्म ख़रीदा तो धरसींवा से भाजपा के पूर्व विधायक देवजी पटेल ने। सरायपाली में 50 हज़ार से भी अधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस विधायक किस्मत लाल नंद ने तो टिकट नहीं मिलने पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का दामन थाम लिया।
अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के ख़िलाफ़ ताल ठोंक कर खड़े होने वाले इन उम्मीदवारों की ताक़त का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि पिछले चुनाव में डेढ़ दर्जन सीटों पर ऐसे ही उम्मीदवारों ने सारा चुनावी समीकरण गड़बड़ा दिया था। 90 में से लगभग डेढ़ दर्जन सीटें ऐसी रही हैं, जहां हार-जीत का अंतर पांच हज़ार वोटों से भी कम था। ऐसे में दोनों ही पार्टियों में मान-मनौव्वल का दौर शुरू हो चुका है। कम से कम नाम वापसी की तारीख़ तक तो यह सिलसिला चलेगा ही।
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