रायगढ़, शासन द्वारा ट्रायफेड एवं छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से 52 प्रकार के लघु वनोपज का समर्थन मूल्य निर्धारित कर त्रिस्तरीय स्व-सहायता समूहों के संरचना के माध्यम से वन वासियों का लघु वनोपज का क्रय एवं प्राथमिक प्रसंस्करण करने अधोसंरचना का निर्माण किया गया है जिसे वनधन विकास केन्द्र कहा जाता है वन मंडल धरमजयगढ़ अंतर्गत कुल 13 वनधन विकास केन्द्रों का निर्माण मनरेगा से स्वीकृत कर जिला पंचायत के द्वारा किया गया है। प्रत्येक वनधन केन्द्र में लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण कार्य से 300-350 हितग्राही लाभान्वित हो रहे है।
वनधन विकास केन्द्र कडेना में सवई घास से टोकरी और कोस्टर (डायनिंग टेबल सेट)निर्माण करने वाले प्रभारी स्व-सहायता समूह को वनधन विकास केन्द्र कलस्टर में विविधता हेतु भारत सरकार के ट्रायफेड के द्वारा जगलपुर में राज्य स्तर में तृतीय पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र दिया गया जिससे कलस्टर के समस्त समूह गौरवान्वित एवं उत्साहित महसूस कर रहे हैं।

भविष्य में सवई घास से टोकरी एवं कोस्टर के अतिरिक्त अन्य उत्पाद तैयार करने उत्पादन आधारित प्रशिक्षण करने रणनीति तैयार की जा चुकी है। जिससे सवई घास प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा कर 300-350 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है।
छ.ग.राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में स्थापित वनधन केन्द्रों में प्रसंस्करण कार्य समूहों के द्वारा किया जा रहा है। इनमें परिक्षेत्र धरमजयगढ़ के वनधन केन्द्र आमापाली में कार्यरत जनमित्रम दुर्गा स्व-सहायता समूह द्वारा माहुलपत्ता प्रसंस्करण केन्द्र, बोरो में जनमित्रम उजाला स्व-सहायता समूह द्वारा लाख पालन प्रसंस्करण केन्द्र, बाकारूमा के कडेना में सरस्वती स्व-सहायता समूह द्वारा सबई टोकरी प्रस्संकरण केन्द्र, छाल के कुड़ेकेला में जमुना स्व-सहायता समूह द्वारा छिंद घास प्रसंस्करण केन्द्र, कापू में शारदा स्व-सहायता समूह द्वारा तैलीय बीज प्रसंस्करण केन्द्र, लैलूंगा के कुंजारा में मां-महामाया स्व-सहायता समूह द्वारा तैलीय बीज प्रसंस्करण केन्द्र तथा लैलूंगा के लिबरा में तारिणी स्व-सहायता समूह द्वारा माहुलपत्ता प्रसंस्करण का कार्य कराया जा रहा है।
इसी तरह 7 अन्य वन धन केन्द्र में प्रस्तावित कार्य एवं प्रसंकरण हेतु कार्ययोजना तैयार की गई है। जिसमें परिक्षेत्र छाल के वनधन केन्द्र हाटी में गंगा स्व-सहायता समूह द्वारा सवई टोकरी प्रसंस्करण केन्द्र में 100 हितग्राहियों को टोकरी निर्माण हेतु प्रशिक्षण दी गई है। छाल के बनहर में झांसी स्व-सहायता समूह द्वारा 70 हितग्राहियों को छिंद घास से झाडू एवं चटाई निर्माण हेतु प्रशिक्षण दी गई है। बोरो के जबगा में जनमित्रम स्व-सहायता समूह द्वारा 50 हितग्राहियों को छिंद घास से झाडू निर्माण हेतु प्रशिक्षण दी गई है। बोरो के खम्हार में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा सेनेटरी नेपकीन निर्माण कार्य किया जा रहा है। लैलूंगा के बगुडेगा में राजलक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा 50 हितग्राहियों को इमली से बीज निकालने हेतु ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण दी गई है। लैलूंगा के तोलगे में शांति स्व-सहायता समूह द्वारा 65 हितग्राहियों को इमली से बीज निकालने हेतु ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण दी गई है।
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