सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में कई स्कूल भवनों की हालत जर्जर है। बिलाईगढ़ ब्लाक से 8 किलोमीटर दूर लिमतरी गांव में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। इसके बावजूद जर्जर भवन की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

इस स्कूल में गांव के करीब 100 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई करते हैं। स्कूल बिल्डिंग की हालत खस्ताहाल होने से अब अभिभावक भी अपने बच्चों को भेजने से कतरा रहे हैं। जो छात्र आ रहे हैं उन्हें भी कई बार बाहर जमीन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

टपकती छत, दरकती दीवार –

बताया जा रहा है कि, लिमतरी गांव में स्थित स्कूल में बरसात के दिनों में छत की सीलिंग का प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे गिर जाता है। वहीं प्राथमिक शाला के दीवारें बेहद कमजोर हो चुकी हैं और इनमें बड़ी बड़ी दरार आ गई है। जिससे दीवार गिरने से कभी भी अनहोनी हो सकती है। बच्चों की जान पर भी आफत आ सकती है।

बारिश में बाहर बैठकर हो रही पढ़ाई
बारिश के मौसम में स्कूल भवन की छत से पानी भी टपकता है। जिसके कारण बच्चों को बाहर जमीन पर बैठकर पढ़ाया जा रहा है। स्कूल परिसर में घास के बीच पढ़ने से कीट और जीवों के भी काटने का खतरा बना हुआ है। वहीं अगर बाहर बारिश होती है तो बच्चों को हॉल में बैठाकर पढ़ाई करवानी पड़ती है। लेकिन हॉल भी छोटा होने से ज्यादा बच्चों को बैठाना मुश्किल है।
‘भवन को अब तक देखने भी कोई नहीं आए’
ग्राम लिमतरी के सरपंच ने बताया कि जर्जर स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए 2018 से मांग की जा रही है। ब्लाक शिक्षा अधिकारी से लेकर कलेक्टर तक इसकी शिकायत की गई है मगर स्कूल भवन की हालात जस की तस बनी हुई है। वहीं स्कूल के शिक्षक कन्हैया पटेल ने बताया कि इस जर्जर स्कूल भवन के बारे में कई बार संकुल के माध्यम से सूचना दी गई है, पर भवन को देखने तक कोई अधिकारी नहीं आए हैं।
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