नौकरी दिलाने का झांसा देकर 13 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामले में कई लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। भालूबासा मुस्लिम बस्ती निवासी बुशरा खातून ने दर्ज शिकायत में बताया कि वह और उसकी बहन रेलवे भर्ती बोर्ड की एनटीपीसी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इस दौरान उनके पिता की मुलाकात मोहम्मद फैसल नामक व्यक्ति से हुई। फैसल ने खुद को रेलवे के उच्च अधिकारियों से संपर्क रखने वाला बताते हुए दोनों बहनों को रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि फैसल ने नौकरी दिलाने के एवज में प्रति दोनों बहनों के लिए आठ-आठ लाख की मांग की। बाद में बातचीत के दौरान 15 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायत के अनुसार अक्तूबर 2025 से नवंबर 2025 के बीच अलग-अलग किस्त में आरोपियों के बताए बैंक खातों और यूपीआई आईडी पर लाखों रुपये भेजे गए। इसके बाद पीड़ित पक्ष को मेडिकल जांच, दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू के नाम पर कोलकाता भी बुलाया गया।
फर्जी नियुक्ति पत्र
आवेदन में कहा गया कि आरोपियों ने रेलवे के नाम से फर्जी ईमेल आईडी से नियुक्ति पत्र और प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज भेजे। दोनों बहनों को ओडिशा के राजगांगपुर रेलवे स्टेशन में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया, जहां उन्होंने कई महीनों तक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इस दौरान वेतन के नाम पर कुछ राशि भी बैंक खातों में भेजी गई, जिससे उन्हें नौकरी असली होने का भरोसा होता रहा।
पुलिस द्वारा जांच
मामले का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस सत्यापन के दौरान रेलवे विभाग से प्राप्त दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पीड़ितों को एहसास हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। शिकायत में मोहम्मद फैसल, निखिल सर, संजीता खरसैल, मेडिकल एवं दस्तावेज सत्यापन कराने वाले व्यक्ति, एसके शाहिद आलम, एमआर एसके एमडी साहेब समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने, सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर रुपये वसूलने और संगठित तरीके से धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
पुलिस सत्यापन पत्र की भूमिका
छत्तीसगढ़ के स्टेशनों पर योगदान देने को लेकर लेटर भेजा
मामले का खुलासा तब हुआ, जब दोनों बहनों का पुलिस सत्यापन पत्र डाक के माध्यम से सीतारामडेरा थाना पहुंचा। सत्यापन के दौरान पुलिस को दस्तावेजों पर संदेह हुआ और दोनों से भर्ती प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत पूछताछ की गई। इसपर पीड़ितों ने संबंधित लोगों से संपर्क किया तो उन्हें पुलिस को गोलमोल जवाब देने की सलाह दी गई। थाना द्वारा सत्यापन के लिए दस्तावेज रेलवे विभाग को भेजे गए, लेकिन वे वापस लौट आए। इस बीच मार्च 2026 में दोनों बहनों को ई-मेल के माध्यम से कथित नियुक्ति और ज्वाइनिंग लेटर प्राप्त हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर योगदान देने का निर्देश दिया गया था। जब पुलिस ने दोबारा बुलाकर दस्तावेज और ई-मेल की जांच की तो नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद दोनों बहनों को एहसास हुआ कि उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर लाखों रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया है।
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