रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना लागू हो चुकी है। राज्य के 97 प्रतिशत कर्मचारियों ने पुराने पेंशन योजना को चुन भी लिया है।

इसके बावजूद करीब आधे सरकारी कर्मचारी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं। क्योंकि पुरानी पेंशन योजना लागू करने में सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं, उसके चलते उन्हें इसका पूरा फायदा मिलता दिख नहीं रहा।
दरअसल, यह पूरा विवाद शिक्षाकर्मी से शिक्षक बने कर्मचारी से जुड़ा है। 1998 से लेकर 2016 तक अलग अलग चरणों में इन सभी की नियुक्ति बतौर शिक्षाकर्मी के रुप में हुई। लगातार संघर्ष के चलते इन्होंने शिक्षक पदों पर संविलियन कराने में सफल रहे, लेकिन अब वही प्रावधान इनके गले की फांस बन रहा है। सरकार ने 2018 में इन्हें संविलियन कर शिक्षक बनाया, और उसी साल से इन्हें नियमित कर्मचारी मान रही है, लिहाजा, पुरानी पेंशन योजना को स्वीकार करने की स्थिति में भी नियुक्ति वर्ष 2018 ही माना जा रहा है।
ऐसे में हजारों शिक्षक ऐसे हो गए हैं, जो फुल पेंशन पाने से बाहर हो गए। यानी, पुरानी पेंशन को स्वीकार करने के बाद भी उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। अब ये शिक्षक नियुक्ति तिथि सेवा काल की गणना की मांग कर रहे हैं। नहीं तो जल्द ही सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दे रहे हैं।
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