रायगढ़: सवई घास से तैयार हो रही महिलाओं के स्वावलंबन की डोर…संग्रहण एवं प्रसंस्करण के माध्यम से 280 महिलाओं को मिला रोजगार….

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जगन्नाथ बैरागी

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रायगढ़, सवई घास जिसकी उपयोगिता कल तक केवल रस्सी तक सीमित थी। उन्हीं सवई घास को महिलाओं द्वारा गढ़कर सुन्दर और आकर्षक टोकरी, कोस्टर एवं रस्सी का रूप दे रही है। सवई घास की उपयोगिता और मूल्य को महिलाओं ने बढ़ाया, वही प्रसंस्करण के माध्यम से उन्हे रोजगार का अवसर भी मिला। रोजगार मिलने से जहां महिलाओं में आत्मविश्वास आया है, साथ ही अब वो स्वावलंबी हो चुकी है। महिलाए अतिरिक्त आय से घर की छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है। साथ ही घर चलाने में आर्थिक सहयोग कर पाने से महिलाएं भी बेहद खुश है।
धरमजयगढ विकासखंड अन्तर्गत वन परिक्षेत्र बाकारूमा अंतर्गत वन धन विकास केन्द्र कडेना के सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह एवं अन्य 11 समूहों के द्वारा प्रसंस्करण का किया जा रहा है। वर्तमान में इन समूहो द्वारा 24.16 क्ंिवटल सबई घास का प्रसंस्करण किया जा चुका है। जिसका बाजार मूल्य 6 लाख 10 हजार से अधिक है। महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे इन सुन्दर और आकर्षक टोकरियों की बाजार में अच्छी मांग है। जिससे समूह की महिलाओं का उत्साह बढ़ा है। सवई घास के संग्रहण और प्रसंस्करण के माध्यम से 280 महिलाओं को सीधा रोजगार मिल रहा है। जिससे महिलाओं द्वारा 3 हजार रुपये से 3 हजार 500 रूपए की अतिरिक्त आय की प्रतिमाह प्राप्त हो रही है। इसके अलावा निर्मित सवई घास की टोकरी को शासन स्तर पर मंत्रीमंडल को उपहार स्वरूप प्रदान भी किया गया। जिससे समूह की महिलाएं उत्साहित हुए, कार्य के प्रति दुगनी लगन से जुटे हुए है।
जिला वनोपज सहकारी यूनियन धरमजयगढ़ द्वारा बताया कि प्रसंस्करण से पूर्व मास्टर टे्रनर द्वारा 12 दिवसीय प्रशिक्षण में 100 सदस्यों को टोकरी एवं कोस्टर निर्माण में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में कुशल 6 सदस्यो को मास्टर ट्रेनर के जिला स्तर पर चयन किया गया। अब इनके द्वारा ग्राम स्तर पर 500 सदस्यों को टोकरी निर्माण कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे सवई घास प्रसंस्करण को बढ़ावा मिल सके एवं 300-350 सदस्यों को लाभान्वित किया जा सके।

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