रायगढ़। अजा वर्ग की एक विवाहित महिला को अपने झांसे में लेने और फिर डरा धमका कर लगातार उसका दैहिक शोषण करने वाले आरोपी अजा अजजा विशेष न्यायालय के जज जितेन्द्र कुमार जैन ने विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास और 26 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। प्रकरण चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है। प्रकरण में आरोपी चक्रधरनगर थाना अंतर्गत बंगाली कॉलोनी सुभाष नगर निवासी नितई देवनाथ आ. स्व. श्रीवास चंद 35 वर्ष मुर्गीफार्म व्यवसायी पर धारा 450, 376 (2) (ढ), 506 व अजा अजजा अधिनियम के तहत एक विवाहित अनुसूचित जाति वर्ग की महिला का लंबे समय तक दैहिक शोषण करने का आरोप था। अभियोजन के अनुसार प्रकरण इस प्रकार है कि आरोपी पीड़िता के घर के बगल में स्थित मुर्गी फार्म में काम करता था, जबकि पीड़िता अपने पति, सास, ससुर व बच्चों के साथ रहती थी। पीड़िता के सास, ससुर आरोपी द्वारा काम करने वाले मुर्गी फार्म व अन्य सामान लेने जाते थे। इसलिए आरोपी का उनसे परिचय हुआ। आरोपी जिस मुर्गी फार्म में काम करता था, वह भी पीड़िता के घर के बगल में था।

आरोपी पीड़िता से पहचान व बातचीत करने का प्रयास करता रहा। पीड़िता के पति, सास, ससुर दिन में नौकरी में घर से बाहर चले जाते थे। इस दौरान आरोपी उससे संपर्क बनाने की कोशिश करते हुए उसके घर आकर उसका मोबाईल नंबर ले लिया और उससे बातचीत करने लगा। बात न करने पर उसके पति के सामने उसे फोन करने की धमकी देकर उससे फोन में बात करने के लिए विवश किया और फिर डरा धमका कर जबरिया उसका दैहिक शोषण करने लगा। 24 नवंबर 2020 से लेकर 24 फरवरी 2021 तक पीड़िता के साथ अनाचार करता रहा जिससे तंग आकर पीड़िता ने आखिरकार आपबीती अपने परिवारवालों को बतायी और फिर चक्रधरनगर थाने में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराया जिसपर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करते हुए चालान कोर्ट में पेश किया था। इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनूप कुमार साहू ने पैरवी की।

इस प्रकरण की सुनवाई पूरी करते हुए विशेष न्यायालय एट्रोसिटीज एक्ट के जज जितेन्द्र कुमार जैन ने आरोपी नितई देवनाथ पर दोष सिद्ध होने पर धारा 450 के तहत 6 साल सश्रम कैद व 1 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 376 (२) (ढ़) के तहत 10 साल सश्रम कैद व 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 506 के तहत 1 वर्ष सश्रम कैद व 1 हजार रुपये जुर्माना, अजा अजजा (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा ३ (2) (5) के तहत आजीवन कारावास व १० हजार रुपये जुर्माना तथा अजा अजजा (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3 (1) (आर) के अपराध में 6माह सश्रम कैद व ४ हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। सभी सजायें साथ साथ चलेंगी।
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