रायगढ़। तमनार क्षेत्र में अभी भी फ्लाईएश की अवैध डंपिंग नहीं रुकी है। प्लांटों को एक तरह से खुली छूट दे दी गई है। अब तो केलो नदी किनारे भी एश डंप कर दिया गया है जो बारिश के साथ बहकर नदी में मिल रहा है। यही पानी केलो डैम में पहुंच रहा है। केलो नदी को केवल रायगढ़ शहर के लोग दूषित नहीं कर रहे हैं बल्कि कई प्लांट भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। नदी के अपर कैचमेंट एरिया में कई प्लांट स्थापित हैं। इनमें से उत्सर्जित फ्लाई एश और दूषित पानी केलो नदी में छोड़ा जा रहा है।

एनजीटी की कमेटी ने इन कंपनियों पर जुर्माना किया था लेकिन कोई सुधार नहीं आया। पर्यावरण विभाग ने एक तरह से इन प्लांटों को खुली छूट दे दी है। अब तमनार क्षेत्र में बड़ा मामला सामने आया केलो नदी के किनारे ही फ्लाई एश डंप कर दिया है। बारिश में यह राख बनकर नदी के पानी में मिल रही है आगे जाकर इस पानी का उपयोग पूरा रायगढ़ कर रहा है इस पर किसी का ध्यान नहीं है। एनजीटी ने फ्लाई एश के अवैध डंपिंग पर जुर्माना करने के लिए फार्मूला लागू किया है लेकिन अब तक इसका प्रयोग किसी प्रकरण में नहीं किया गया है।
पर्यावरण विभाग के अनुसार एनजीटी ने शर्तों के साथ लो लाइंग एरिया में फ्लाई एश डंप करने को अनुमति दी है। अब लो लाइंग एरिया की परिभाषा ही बदल दी गई है। कहीं भी एश डंप करने की अनुमति दी जा रही है। इस वजह से प्लांटों ने हाईवे किनारे भी फ्लाई एश डंप कर दिया है ।
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