रायगढ़, प्रेम प्रसंग में दुल्हन बनाने का दिवास्वप्न दिखाते हुए भगा ले जाने के बाद शादी से मुकरने पर दुखी युवती द्वारा फांसी लगाने के मामले में विशेष न्यायाधीश ने मुल्जिम युवक को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है । साथ ही उसे 1 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित भी किया है । विशेष लोक अभियोजक अनूप कुमार साहू ने बताया कि बरमकेला थानांतर्गत ग्राम सराईपाली निवासी संतोष पिता निलेश मालाकार ( 30 वर्ष ) ने अनुसूचित जाति की एक सदस्या को पहले अपने प्रेमजाल में फंसाया और ब्याह रचाने का झांसा देते हुए विगत 30 सितंबर 2016 को अपने साथ भगा ले गया । युवक ने युवती को ट्रेन में बैठाते हुए ग्राम पथरा भेज दिया । वहां युवती ने अपनी दादी को फोन कर बताया तो परिजन उसे लेकर घर चले गए। युवती अपने प्रेमी के भाग जाने से इस कदर दुखी हुई कि 5 अक्टूबर के तड़के उसने अपने घर के बाथरूम में दुपटटे का फंदा बनाया और उसमें झूलते हुए खुदकुशी कर ली थी।

इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भादंवि की धारा 306 एवं अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (2) (वी) के तहत मुकदमा पंजीबद्ध करते हुए चालान को न्यायालय में पेश किया था। तकरीबन 6 साल तक कोर्ट में चले इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और सभी पहलुओं पर ध्यानाकर्षण के बाद आरोपी प्रमाणित होने पर संतोष मालाकार को धारा 306 के तहत 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारणअधिनियम की धारा 3 (2) (वी) के अपराध में 1 हजार रूपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है । नियत समय पर अर्थदंड की राशि चुकता नहीं कर पाने की स्थिति में 10-10 दिन के अतिरिक्त सजा का निर्देश भी दिया गया है ।
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