रायगढ़ जिले के समस्त ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने दिनांक 25 अप्रैल 2022 को अपने दो सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर रायगढ़ एवं उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपा।
अधिकारियों का पहला मांग अप्रैल माह का वेतन तत्काल आहरण करने का आदेश जारी किया जावे एवं दूसरा मांग राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत किसानों की हस्ताक्षर युक्त लक्ष्य के शत प्रतिशत सहमति पत्र देने की बाध्यता को शिथिल किया जावे।

कृषि विभाग में पहले माह मार्च का वेतन रोका गया था एवं इसी क्रम में माह अप्रैल का भी वेतन रोक दिया गया है। इस तरह बार बार वेतन रोकने से अधिकारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी का समय बच्चों के स्कूल फीस भरने, शादी ब्याह के दिन, लोन का किश्त इत्यादि महत्त्वपूर्ण कामों के लिए पैसे की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में वेतन रोक जाने से समस्त मैदानी अमला आहत और प्रताड़ित महसूस कर रहा है। किसी एक योजना विशेष के लिए इस तरह बार बार वेतन रोकने की कार्यवाही का ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने कड़ी निन्दा की है। जबकि अन्य सभी योजनाओं में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का कार्य उल्लेखनीय है।
शासन द्वारा संचालित राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत किसानों को धान के बदले अन्य लाभकारी फसल लेने का व्यापक प्रचार प्रसार ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, साथ ही जो किसान तैयार हो रहे हैं उनसे सहमति भी लिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन और विभाग अधिकारियों से शत प्रतिशत कृषकों की हस्ताक्षर युक्त सहमति पत्र लेने का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि अधिकांश किसान धान की खेती सरल, उत्पादन अधिक, बिक्री सहजता से होने के कारण अन्य फसल लगाने के लिए सहमत नही हो रहे हैं। साथ ही अन्य फसल लेने से समितियों में पंजीकृत धान का रकबा कट जाने से कतरा रहे हैं। इस कारण ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार करने, कृषक पखवाड़ा आयोजित करने के बाद भी किसान तैयार नहीं हो रहे हैं। फिर भी कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी इस चुनौती पूर्ण कार्य को करने के लिए तैयार हैं और कर भी रहे हैं लेकिन शत प्रतिशत हस्ताक्षर युक्त सहमति की बाध्यता को शिथिल किया जाता है तो इस कार्य को उत्साह के साथ किया जाएगा।
अवगत हो की कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की दो संघ संचालित हैं एक छग ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ और दूसरा छग कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ, दोनो संघों ने संयुक्त रूप से अपने दोनो मांगों के लिए लामबंद हुए हैं। कल दिए ज्ञापन में दोनों संघों के जिलाध्यक्षों के साथ अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित हुए। यदि मांगों को पूरी नहीं की जाती है तो अधिकारियों को विवश होकर कलम बंद काम बंद करना पड़ जायेगा।
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