छत्तीसगढ़ – सर, छेड़छाड़ की रिपोर्ट नहीं लिखी थाना प्रभारी ने, मेरी बेटी को मारकर लटका दिया साहब, छत्तीसगढ़ की हृदय विदारक घटना, आँखों मे खुन की आंसु लिए न्याय के लिए भटकती बेबश माँ… रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां…..

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जगन्नाथ बैरागी

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गौरेला पेंड्रा मरवाही – जिले के पेंड्रा थाना अंतर्गत ग्राम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धोबहर में हुए महिला आत्महत्या के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। मृतिका की माँ बिलासिया बाई ने अपनी बेटी चंपा की मौत को लेकर हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए GPM पुलिस अधीक्षक को लिखित में शिकायत प्रस्तुत किया है।

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उक्त शिकायत में मां बिलासिया बाई ने अपनी बेटी के कथित पति अमित ध्रुव, उनके दीदी, जीजा, उसकी सास, रुपेंद्र भदौरिया, विक्रम भदौरिया सहित सरपंच ध्यानसिंह पोर्ते के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने की गुहार लगाई है।

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गौर से देखिए इस महिला को, आंखों में अश्क लिए एक तरफ अपनी बेटी के नहीं रहने का गम, वहीं दूसरी ओर अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय को लेकर न्याय पाने रोती बिलखती माँ ।

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छत्तीसगढ़ गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम धोबहर निवासी यह गरीब महिला की बेटी चंपा बाई जो गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत अमित ध्रुव की कथित पत्नी थी जिसकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। मृतिका की माँ के आरोप अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धोबहर में पदस्थ रूपेंद्र सिंह भदोरिया (ड्रेसर) द्वारा उसकी बेटी से छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई।

अपने साथ हुए घटना की शिकायत को लेकर पीड़िता चंपा बाई पेंड्रा थाना पहुंची जिसके बाद छेड़छाड़ के आरोपी रुपेंद्र भदोरिया के पुत्र विक्रम भदोरिया द्वारा पीड़िता को शिकायत नही करने की बात कहते हुए पेंड्रा थाने से वापस ले आया। वापस आने के बाद गांव के सरपंच ध्यानसिंह पोर्ते, छेड़छाड़ करने वाले कर्मचारी रूपेंद्र भदौरिया, सहित कई लोगों के संरक्षण में अस्पताल में बैठक किया गया। बैठक के दौरान छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामले को लेकर 20 हजार रुपये का प्रलोभन देते हुए शिकायत नहीं करने की समझाईश के साथ-साथ नहीं मानने पर आरोपियों को संरक्षण देने वाले कथित जनसभा में पीड़िता को झूठे मामले में फसाकर जेल भेज देने की भी धमकी दी गई।

बावजूद प्रतिष्ठा को सर्वोच्च मानते हुए विषम परिस्थिति के बावजूद आत्मरक्षा और लज्जा का मूल्यांकन करते हुए दूसरे दिन न्याय की आस में पेंड्रा थाना के समक्ष सुबह 10:00 बजे से लेकर 3:00 बजे तक न्याय पाने मिन्नतें करने लगे। लेकिन वहाँ पदस्थ थाना प्रभारी प्रवीण द्विवेदी के द्वारा रिपोर्ट नहीं लिखा गया , हालांकि शिकायत सुनने के बाद पुलिस ने महिला के बताए अनुसार रुपेंद्र सिंह भदोरिया के खिलाफ कई तरह के आपराधिक मामलों से संबंधित शिकायत होने की बात कही। लेकिन इसी बीच गांव के सरपंच ध्यानसिंह पोर्ते के द्वारा पुलिस को फोन कर मामले पर कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई।

सरपंच के फ़ोन आते ही पेंड्रा पुलिस के शब्द और व्यवहार एकाएक बदल गए और उल्टा पीड़ित पक्ष को झूठे मामलों में जेल भेज देने की धमकी के साथ-साथ मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामलों की शिकायत पूर्व में प्राप्त होने की बात कही गई और जेल भेज देने की धमकी दी गई। बावजूद दोपहर 3 बजे तक पीड़िता और मां थाना प्रभारी के समक्ष न्याय की आस लिए टकटकी लगाए बैठे रहे। लेकिन कुछ हासिल होता नहीं देख बेबश मां और पीड़िता निराशा साथ लिए “गरीब का कोई नहीं – वाह रे पुलिस” कहते हुए मां बेटी दोनों वापस अपने घर वापस आ गए।

अपने साथ हुए घटना और आत्म सम्मान के साथ साथ न्याय की उम्मीद लेकर रोती बिलखती मां अपनी पुत्री चंपा बाई को लेकर शनिवार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला दंडाधिकारी के दफ्तर पर पहुंच गए लेकिन विषम परिस्थिति के साथ-साथ समय की मार से वहाँ भी सिर्फ निराशा ही मिली क्योकि शासकीय आदेशानुसार अवकाश था। वापस घर आने के बाद उसी दिन शाम को चंपा बाई को उसके कथित पति अमित धुव्र की मां द्वारा चंपा बाई को कहा गया कि हम लोग शाम को घर चले जाएंगे आप अपना सामान आकर देख लो, जिसके बाद मृतिका चंपाबाई समान देखने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निवास स्थान पर गई और फिर वापस नहीं आई।

शिकायतकर्ता बिलासिया बाई के शिकायत अनुसार रविवार की सुबह लगभग 5:00 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धोबहर में पथरीटोला करसीवा से प्रसव कराने आए लोगों ने आम के पेड़ में किसी महिला को लटके हुए देखा जिसके बाद उन लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने स्थित लोगों को आवाज देते हुए इसकी जानकारी देने लगे। इसी दौरान पीड़िता की मां बिलासिया बाई जब काम के लिए बाहर निकल रही थी तभी भीड़ को देखते हुए घटनास्थल पर पहुंची जहां दूर से ही देखते साथ उसने अपनी बेटी चंपाबाई को पहचान लिया। बेटी को फाँसी के फंदे पर लटके देख बिलासिया रोते बिलखते हुए अपने साथ हुए अन्याय को लेकर रोने लगी और न्याय का दावा दिलाने वाले सभी सिस्टम को कोसने लगी।

घटना की सूचना पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और लोगों का हुजूम लग गया। पुलिस मौके पर सरपंच की उपस्थिति में मृतिका के शव को उतारते हुए पोस्टमार्टम के लिए पेंड्रा इंदिरा उद्यान के पास धरम अस्पताल ले कर गए। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान मृतिका का भाई जगदीश अपनी बहन के शव के साथ जिले के शवविच्छेदन केंद्र पहुंचा। यहां भी शव विच्छेदन के नाम पर पीड़ित परिवार से 200 रुपये की राशि की मांग कर डाली जिसके बाद मृतिका का भाई जगदीश असमर्थता जाहिर करते हुए राशि देने से इनकार करते हुए पोस्टमार्टम कराने मिन्नतें करने लगा।

मृतिका के भाई के अनुसार इस दौरान महज कागज में पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी कर दी गई, वहीं मृतिका के मां ने भी अपनी मृत बेटी के पोस्टमार्टम संबंधी किसी भी प्रकार के विच्छेदन से इनकार करते हुए पोस्टमार्टम नहीं होने की बात कही और बिना पोस्टमार्टम के पुलिस और डॉक्टरों की मिलीभगत से दबाव पूर्वक अंतिम संस्कार तक करा डाला।

महिला के आरोप अनुसार इस पूरे मामले में निष्पक्ष न्याय का दावा करने वाले पुलिस विभाग में पदस्थ संबंधित कर्मचारी एवं अधिकारी के साथ-साथ पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिला के आरोप से कई बिंदुओं पर सवाल उठना लाजमी है। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार मृतिका चंपा बाई के साथ छेड़छाड़ जैसे संगीन घटना को अंजाम देने की कोशिश की गई जिसकी शिकायत संबंधित जिम्मेदार पुलिस अधिकारी पेंड्रा थाने में पदस्थ प्रवीण द्विवेदी के समक्ष न्याय की गुहार लगाई गई। बावजूद महिला के साथ हुए इस तरह के संगीन मामले में पुलिस महानिदेशक के सख्त निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता बिलासिया बाई के अनुसार पुलिस ने पहले तो छेड़छाड़ के आरोपियों को संरक्षण देने का प्रयास किया, उसके बाद संरक्षण पाकर पीड़िता चंपा बाई के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों के बाद समझौता कराने का प्रयास किया गया और नहीं मानने पर कथित पति अमित ध्रुव, रुपेंद्र भदौरिया, सरपंच ध्यान सिंह पोर्ते सहित अमित ध्रुव की माँ, दीदी जीजा द्वारा चंपा बाई को मारकर आत्महत्या का शक्ल देने पेड़ पर लटका दिया।

इस मामले में मृतिका की माता शिकायतकर्ता बिलासिया बाई ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि पेंड्रा थाना प्रभारी द्वारा मेरी बेटी के साथ हुए छेड़छाड़ की शिकायत को गंभीरता से लेती तो आज मेरी बेटी जीवित रहती और मेरे साथ रहती।

अब सवाल यह उठता है क्या वास्तव में पुलिस के संरक्षण में चंपा बाई की हत्या कर दी गई ? क्या वास्तव में चंपा बाई के साथ हुए छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराध पर पुलिस का अपराधियों को संरक्षण मिलता गया ? क्या मृतिका का पोस्टमार्टम नहीं किया गया? और यदि नही तो क्या पीड़िता के शिकायत पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धोबहर में पदस्थ ड्रेसर रुपेंद्र सिंह भदोरिया के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई करते हुए अपराध पंजीबद्ध किया गया है? क्या वास्तव में पीड़िता को छेड़छाड़ की शिकायत नहीं करने को लेकर दबाव बनाया गया, या प्रलोभन दिया गया या कोई कार्यवाई की गई है ?

न्याय की आस लिए इस महिला के अश्क चीख चीख कर कह रहे है कार्यवाही निष्पक्ष नहीं की गई है । बिलासिया बाई द्वारा इस तरह के आरोप को लेकर मृतका की मां द्वारा जीपीएम पुलिस अधीक्षक के समक्ष निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है और इस शिकायत पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष किरणमई नायक, पुलिस महानिदेशक के साथ-साथ बिलासपुर रेंज आईजी को भी प्रतिलिपि प्रेषित किया गया है।

अब देखना होगा हत्या के आरोप और छेड़छाड़ में कार्रवाई को लेकर शिथिलता सहित इन गंभीर मामलों में पुलिस कब जागती है। पुलिस द्वारा क्या इस महिला को न्याय मिलेगा? क्या इनके आरोपों में सच्चाई है? आखिर कब मिलेगा इस महिला को न्याय ? इस महिला के आरोप ने न्याय का दावा करने वाले पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है साथ ही महिला ने उच्चस्तरीय शिकायत कर जहां सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है वहीं महिला की शिकायत के बाद पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

मरवाही विकासखंड अंतर्गत धोबहर ग्राम में हुए इस घटना को टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल ने प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद राज्य महिला आयोग के द्वारा इस मामले को संज्ञान में लिए जाने की खबर है अब देखना होगा मृतिका की माँ के द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों में किस तरह की जांच होती है और कब तक इस संवेदनशील मामले का पटाक्षेप होता है।

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