सारंगढ़। बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक एवं व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शासकीय प्राथमिक शाला साराडीह के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। प्रधान पाठक रमाशंकर साहू के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने खैरहा स्थित संचालनालय रेशम उद्योग का भ्रमण कर रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को करीब से जाना और नई जानकारियां प्राप्त कीं।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने रेशम उद्योग की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और जाना कि किस प्रकार कोसा (ककून) से रेशम का धागा तैयार किया जाता है। उद्योग के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहतूत के पौधों पर रेशम के कीड़ों का पालन किस प्रकार किया जाता है तथा विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद कोसा से रेशम का धागा तैयार होता है। इसके बाद कताई-बुनाई के माध्यम से चमकदार रेशमी वस्त्र बनाए जाते हैं।
इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को रेशम उत्पादन के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और रोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। बच्चों ने उत्सुकतापूर्वक विभिन्न प्रक्रियाओं को देखा और अपने ज्ञान में वृद्धि की। इस तरह के भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई जाने वाली विषय-वस्तु को वास्तविक जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रधान पाठक रमाशंकर साहू ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को व्यावहारिक अनुभव भी उपलब्ध कराना आवश्यक है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, खोजी प्रवृत्ति और विज्ञान के प्रति रुचि विकसित होती है। साथ ही, उन्हें विभिन्न उद्योगों की कार्यप्रणाली और भविष्य में रोजगार के अवसरों को समझने में मदद मिलती है।
इस एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण को सफल बनाने में शाला के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा। भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को सीखने का एक नया और रोचक अनुभव प्राप्त हुआ।
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