सारंगढ़। ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने, अतिरिक्त आमदनी का अवसर उपलब्ध कराने और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैकयार्ड कुक्कुट योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को मुर्गीपालन के जरिए आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के लिए निर्धारित 191 इकाइयों के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 150 इकाइयों का वितरण किया जा चुका है। शेष 41 इकाइयों का वितरण 4 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना के तहत एक इकाई की कुल लागत 3,000 रुपये निर्धारित है। इसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 90 प्रतिशत यानी 2,700 रुपये का अनुदान दिया जाता है, जबकि सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत यानी 2,250 रुपये का अनुदान मिलता है। इससे ग्रामीण परिवारों को कम लागत में मुर्गीपालन शुरू करने और आय का अतिरिक्त साधन विकसित करने में मदद मिलती है।
प्रत्येक इकाई में हितग्राही को वनराज नस्ल के 28 दिन आयु के 45 चूजे तथा 10 किलोग्राम कुक्कुट आहार उपलब्ध कराया जाता है। वनराज नस्ल की मुर्गियों की विशेषता यह है कि वे सालाना लगभग 280 से 300 अंडे देने की क्षमता रखती हैं। इससे हितग्राही अंडों के साथ-साथ मुर्गियों के मांस की बिक्री कर भी नियमित आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
बैकयार्ड कुक्कुट पालन ग्रामीण परिवारों के लिए कम लागत में आजीविका का बेहतर विकल्प बन सकता है। घर के आसपास उपलब्ध स्थान में मुर्गियों का पालन कर परिवार अपनी जरूरत के लिए अंडे और मांस प्राप्त करने के साथ अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेच सकता है। इससे परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध होने के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर भी मिलता है।
योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना, हितग्राहियों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शेष 41 इकाइयों का वितरण 4 नवंबर तक पूरा होने पर जिले में कुल 191 इकाइयों के वितरण का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।
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