सारंगढ़। छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ के आह्वान पर सारंगढ़ इकाई की कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील कार्यालय परिसर के समीप एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। धरना समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र निराकरण की मांग की गई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने कहा कि वे लंबे समय से महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बच्चों के पोषण, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं की देखभाल, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता सहित अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से ठोस पहल करने की मांग की।
संघ की प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को नियमित करने की मांग सबसे प्रमुख रही। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये तथा सहायिकाओं को 25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग की गई। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर तथा सहायिकाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे को उठाते हुए समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) जैसी सुविधाएं प्रदान करने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में आश्रित परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने तथा सेवानिवृत्ति के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पांच लाख रुपये और सहायिका को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की गई।
ज्ञापन में मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष एक हजार रुपये मानदेय वृद्धि किए जाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। संघ की सारंगढ़ इकाई ने सरकार से अपील की कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें सम्मानजनक मानदेय, सेवा सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।
एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी मांगों को लेकर संगठित हैं और उनके निराकरण के लिए सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा करती हैं। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इन मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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